Tuesday, February 21, 2012

पैसा

ये दुनिया बस है पैसों का खेल
कहते है, पैसा तो है हांथो का मैल
मैल कहाँ रह पता है सदा
धुल जाता है इक पल में
साबुन पानी जो लगे जरा
कितना इस पर इतरोगे
तुम कब तक नहीं नहाओगे
मैल अधिक जम जाये तो
जिस्म भी छलनी हो जाता है
क्यों इसके पीछे भाग रहे
नाते रिश्ते सब त्याग रहे
जोड़ - जोड़ कर इक पैसा
तुने अम्बार लगाया है
गैर तो गैर इस पैसे के लिए
अपनों तक खून बहाया है
लेकिन क्या कभी चैन की नींद सो पाया है ?
अब तक जो भी कमाया है
चैन सुकून जिसके लिए गवाया है
कुछ न साथ जायेगा
सब यहीं रह जायेगा
तेरे बाद औरो को लड़वायेगा
इस पैसे का यही खेल
हाँथ को अपने धोते रहो
अगर ये है हांथो का मैल

Thursday, February 16, 2012

अगर तुम मेरे हो तो...............

वक्त ने जो पैदा किया है दूरियां
असर इसका न मुझ पर पाओगे
कोशिश हम करते रहेंगे तुम्हे बुलाने की
अगर तुम मेरे हो तो न चाहते हुए ही लौट आओगे

फुर्सत जो मिले कभी जरा भी
या महसूस हो कमी किसी अपने की
आँख बंद करके देखना
सबसे करीब तुम हमे ही पाओगे

हमने किया है वादा साथ निभाएंगे उम्र भर
दो कदम चल कर तुम कैसे दूर हो जाओगे
हम तो है साया तुम्हरा
दूर हमसे तो चले जाओगे
मगर अपने साये से पीछा कैसे छुराओगे

फिर भी तुम्हे अगर हम पा ना सके तो
नज्म बन कर तेरे लबों पर बस जायेंगे
किसी और के लिए ही सही
नगमा कभी तो कोई गुनगुनाओगे

कोशिश हम करते रहेंगे तुम्हे बुलाने की
अगर तुम मेरे हो तो न चाहते हुए ही लौट आओगे