ये दुनिया बस है पैसों का खेल
कहते है, पैसा तो है हांथो का मैल
मैल कहाँ रह पता है सदा
धुल जाता है इक पल में
साबुन पानी जो लगे जरा
कितना इस पर इतरोगे
तुम कब तक नहीं नहाओगे
मैल अधिक जम जाये तो
जिस्म भी छलनी हो जाता है
क्यों इसके पीछे भाग रहे
नाते रिश्ते सब त्याग रहे
जोड़ - जोड़ कर इक पैसा
तुने अम्बार लगाया है
गैर तो गैर इस पैसे के लिए
अपनों तक खून बहाया है
लेकिन क्या कभी चैन की नींद सो पाया है ?
अब तक जो भी कमाया है
चैन सुकून जिसके लिए गवाया है
कुछ न साथ जायेगा
सब यहीं रह जायेगा
तेरे बाद औरो को लड़वायेगा
इस पैसे का यही खेल
हाँथ को अपने धोते रहो
अगर ये है हांथो का मैल
कहते है, पैसा तो है हांथो का मैल
मैल कहाँ रह पता है सदा
धुल जाता है इक पल में
साबुन पानी जो लगे जरा
कितना इस पर इतरोगे
तुम कब तक नहीं नहाओगे
मैल अधिक जम जाये तो
जिस्म भी छलनी हो जाता है
क्यों इसके पीछे भाग रहे
नाते रिश्ते सब त्याग रहे
जोड़ - जोड़ कर इक पैसा
तुने अम्बार लगाया है
गैर तो गैर इस पैसे के लिए
अपनों तक खून बहाया है
लेकिन क्या कभी चैन की नींद सो पाया है ?
अब तक जो भी कमाया है
चैन सुकून जिसके लिए गवाया है
कुछ न साथ जायेगा
सब यहीं रह जायेगा
तेरे बाद औरो को लड़वायेगा
इस पैसे का यही खेल
हाँथ को अपने धोते रहो
अगर ये है हांथो का मैल