खिलती हुयी सुबह हो,
तुम ढलती हुयी शाम हो |
कड़कती धुप में,
तुम शीतल छांव हो |
अंधेरमयी इस जीवन में,
तुम जगमगाता प्रकाश हो |
माँ हमेशा ही मेरे लिए तुम खास हो.....!!
थक हार कर जब बैठ जाता हूँ मै,
तो जगती तुम नयी आश हो |
भूखा न सो सोजाऊं मैं कहीं
इसलिए रखती तुम उपवास हो
तुम से ही है भूख मेरी
और तुम ही मेरी प्यास हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!
छुपी रही है हमेशा भलाई मेरी,
चाहे तेरी डांट हो, या फटकार हो,
दर जाता हूँ आज भी तेरी ख़ामोशी से,
माँ तुम बैठा न करो यूँ उदास हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!
चाह नहीं है पैसों की, ना नाम की,
ना दुनिया के सलाम की
बस मेरे सर पर उम्र भर,
तेरा आशीष हो तेरा हाँथ हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!

Greetings from the UK.
ReplyDeleteThank you. Love love, Andrew. Bye.
Dear Andrew Thank you for your love. Have you read this blog.. ?
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