Friday, January 25, 2013

बेटी है तो कल है

माँ, बीवी और बहन है बेटी
घर - आँगन और जीवन जो महका देती
सुगन्धित फूलों का वो उपवन है बेटी


















कली सी कोमल, फूलों सी नाजुक
प्रकृति का अनमोल सृजन है बेटी

नीरस से वीरान जीवन में
सुर की गंगा जो बहा देती
सात सुरों का सरगम है बेटी

जब छाता जीवन घनघोर अँधेरा
और नजर न आती रह कोई
तब उम्मीद की आखिरी किरण है बेटी

दुःख संताप की कठिन घडी में
मुस्काता दर्पण है बेटी

बिन बेटी संभव नहीं है
कर पाना इस सृष्टि की कल्पना
बीज अंकुरित होता जहाँ से जीवन का
वो धरा वो गगन है बेटी

बोझ नहीं ये पाप नहीं
जन्म जन्मों के शुभ कर्मों ये तो फल है
बेटी है तो कल है
बेटी है तो कल है

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