Sunday, February 3, 2013

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
किसी मिल जाती है जहाँ भर की खुशियाँ
किसी को एक मुस्कान तक नहीं मिलता
हर किसी को वफ़ा के बदले वफ़ा नहीं मिलता

किसी को मिल जाती है यूँ ही मंजिल
किसी को कारवां तक नहीं मिलता
वो दौर और था जब दो जिस्म एक जान हुआ करते थे
आज साथ क्या, तेरा साया भी नहीं मिलता

जैसे कितनी भी गहराई से लिख लो दास्ताँ दिल की
आँधियों के बाद रेत पर कोई निशान नहीं मिलता  

4 comments:

  1. Inme se kuchh line Nida Fazli Sahab ki bhi hai.
    kabhi kisi ko mukammal jahan nhin milta,
    kahin zameen to kahin aasman nhin milta.

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  2. आशीष और शुभकामनाएं

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