कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
किसी मिल जाती है जहाँ भर की खुशियाँ
किसी को एक मुस्कान तक नहीं मिलता
हर किसी को वफ़ा के बदले वफ़ा नहीं मिलता
किसी को मिल जाती है यूँ ही मंजिल
किसी को कारवां तक नहीं मिलता
वो दौर और था जब दो जिस्म एक जान हुआ करते थे
आज साथ क्या, तेरा साया भी नहीं मिलता
जैसे कितनी भी गहराई से लिख लो दास्ताँ दिल की
आँधियों के बाद रेत पर कोई निशान नहीं मिलता
किसी मिल जाती है जहाँ भर की खुशियाँ
किसी को एक मुस्कान तक नहीं मिलता
हर किसी को वफ़ा के बदले वफ़ा नहीं मिलता
किसी को मिल जाती है यूँ ही मंजिल
किसी को कारवां तक नहीं मिलता
वो दौर और था जब दो जिस्म एक जान हुआ करते थे
आज साथ क्या, तेरा साया भी नहीं मिलता
जैसे कितनी भी गहराई से लिख लो दास्ताँ दिल की
आँधियों के बाद रेत पर कोई निशान नहीं मिलता
Inme se kuchh line Nida Fazli Sahab ki bhi hai.
ReplyDeletekabhi kisi ko mukammal jahan nhin milta,
kahin zameen to kahin aasman nhin milta.
kuchh line nahi sirf ek line
Deleteआशीष और शुभकामनाएं
ReplyDeletethankyou sir
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