Thursday, December 27, 2012

हम युवा ही असली शक्ति है


हम पानी में आग लगा सकते हैं,
हम पत्थर पे फूल खिला सकते हैं,
हम बदल सकते है तक़दीर तुम्हारी,
झुका सकते है क़दमों में दुनिया सारी,

हम युवा ही असली शक्ति है,
बाकी सब तो मिटटी है.
युवा ही था वो वीर भगत, सुखदेव और राजगुरु
श्रधा से हर शीस जिसके आगे झुकती है

याद करो उस खुदीराम,
अंग्रेजो ने फंसी पर जिसे चढ़ाया था,
उम्र थी केवल 19 की,
आजादी की अलख उसने जगाया था.

हमने जो एक बार ठान लिया तो
कुछ भी हम कर जाते है
चट्टानों के सीनों को भी,
चिर के राहे हम बनाते है,

हम पानी में आग लगा सकते हैं
हम पत्थर पे फूल खिला सकते हैं
हम युवा ही असली शक्ति है
बाकी सब तो मिटटी है.

Sunday, December 2, 2012

घर का आँगन


आज कहाँ वो घर का आँगन
जो अंतहीन सा लगता था ???
कभी क्रिकेट तो कभी कबड्डी
का मैदान जो बनता था

हर घर की चारदीवारी में
एक नया जहान सा बसता था
दादा-दादी, मम्मी-पापा,
चाचा-चची, दीदी-बुआ
चहू दिशा से घर का हर दरवाजा
आ कर वही खुलता था

सर्दी की सुबह हो या
गर्मी की रातें
या फिर हो सावन की बरसातें
हर मौसम वही गुजरता था

गूंजता करता था देवर-भाभी की हास्य बम
तो सास-बहु, नन्द-भाभी में
शीत युद्ध भी होता था
आफत सी मच जाती थी घर में
जब बच्चा कोई रोता था

तब होता था एक बूढ़ा चापाकल
जो प्यास सभी की बुझाता था
जलता था एक ही मिटटी का चूल्हा
पर भूखा नहीं कोई सोता था

आँगन नहीं वो एक धुरी थी
जो हमको बांधे रखता था
धीरे-धीरे घटता गया
टुकड़ों में बांटता गया

आज कहाँ वो घर का आँगन
जो अंतहीन सा लगता था ????

Friday, November 16, 2012

जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !


जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान!
परम पिता तुम परमेश्वर मेरे
हम तेरे बालक नादान
हाँथ जोड़ कर हम करे वंदना
ना देना हमे बल और शोहरत
ना देना धन-धान्य
सत्य उअर धरम की राह चले हम
ध्येय हो जनकल्याण
प्रभु देना हमे ये वरदान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!

श्याम वर्ण, तुम श्वेताम्बर धारी
हाँथ तुम्हारे ना खडग, ना कमंडल
ना तीर तलवार
धर्मराज के तुम हो सहायक
कलम - दावत है पहचान
सुर - असुर, नर - मुनि, जिव - प्राणी
धर्म - कर्म का लेखा रखते सबका एक सामान
एक परम पिता हो तुम सबके
भानु, विभानु, विश्व्भानु, विर्यभानु
चारु, सुचारू, चित्राख्य, और मतिमान
हिमवान, चित्रचारु, अरुणा, जितन्द्री सब तेरे संतान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!

ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः नमः नमः

Sunday, November 11, 2012

दिवाली वो बचपन वाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सजता था सवारता था घर का कोना - कोना
और माँ बनती थी रंगोली सात रंगों वाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
जगमग - जगमग  दीपों से
माँ सजाती थी थाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
दिए से दिए जलते थे
और बन जाती थी दीपावली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
गली-चौबारे या हो घर का आँगन
हर जगह होते थे रौशन दिए वो मिटटी वाले

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सुबह से होता था इन्तेजार शाम का
कब नए कपडे पहन हम खेलेंगे लुक्यारी

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
तरह - तरह के पकवान थे बनते
हमारे नजरो में होता था
बम,पटाखे,फुलझड़ी
और मिठाईयों से सजी प्रसाद की थाली

अब सब एक सपना सा लगता है
आज कहाँ है दिवाली वो बचपन वाली
और कहाँ घरौंधे वो मिटटी वाले ??



Monday, November 5, 2012

बदलती जिंदगी

जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे
और बदल रहा कारवां ।

बदल रही है दोस्ती, बदल रहा है प्यार भी 
और बदल रहा है ये जहाँ ।

अपने ही लगे है अब पीठ में खंजर घोपने,
हर कोई लगा है अब पेड़ साजिशों के रोपने,
इस जिंदगी का अर्थ क्या ? और है अंजाम क्या ?

यादें भी बदल रहे है, वादे भी बदल रहे है
और बदल रहा है दास्ताँ ।

ये जिंदगी अब खेल और इंसान खिलौना बन कर रहा गया ।
जिसे जी में आता खेलता है, फिर तोड़ खिलौना चल दिया ।।
बदल रहा सोच भी, बदल रहे लोग भी 
और बदल रही ये दुनिया ।

जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे 
और बदल रहा कारवां ।।

Friday, October 12, 2012

जाने क्या होगा इस देश का...??

जहाँ मंहगा डीजल, महंगी गैस
नेताओं की हो रही पूरी ऐश
जाने क्या होगा इस देश का ??

कहीं कई दिनों से नहीं जले है चूल्हे
नित सामने आते नए घोटाले
जाने क्या होगा इस देश का ??


खुले है नाले, सड़कों का है खस्ता हाल
फिर भी हो रहा भारत निर्माण
जाने क्या होगा इस देश का ??

सुबह खाए तो पड़े भूखा रात को सोना 
गोदामों में सड़ रहा अनाज
जाने क्या होगा इस देश का ??

कहीं पर सुखा कहीं अकाल
नेता हो रहे माला माल
जाने क्या होगा इस देश का ??

जनता मांगे रोजी रोजगार
मोबाईल बांटने चली सरकार
जाने क्या होगा इस देश का ??

कार्टून बनाना हुआ अपराध
बलात्कार हुआ साधारण सी बात
जाने क्या होगा इस देश का ??

चारो तरफ मचा है हाहाकार
लोकतंत्र पर से उठ गया विश्वास
जाने क्या होगा इस देश का ??

Tuesday, October 9, 2012

कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए

भरी महफ़िल में बदनाम हो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए

ओ बेवफा तुने ये क्या किया
मेरी चाहतों का ये कैसा सिला दिया
तेरे प्यार में हम, क्या से क्या हो गए
कभी मशहूर थे आज गुमनाम हो गए

चाह था तुझे मैंने जान से भी ज्यादा
तेरे संग जिंदगी बिताने का था इरादा
ना मंजिल ही पाई मैंने, ना तुझे ही पा सके
इन राहों पे चलते-चलते, हम मंजिल से दूर हो गए
अरमां जो थे दिल के, सब चूर हो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए

तुमने जो मुझे तनहा छोड़ दिया
खुशियों ने भी मेरी, मुझसे मुह मोड़ लिया
तन्हा यूँ जीने का मुझको नहीं कोई अरमान है
मेरे जीवन में अब बची नहीं मुस्कान है
मुस्कान मेरे जाने कहाँ खो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए

भरी महफ़िल में बदनाम हो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए 

बहुत बढ़ गयी है मंगाई, लेकिन नहीं बढ़ी कमाई


आज सबेरे जब दफ्तर मैं पहुंचा
बॉस मेरा मुझसे पहले था आ बैठा
हाँथ जोड़ कर मैंने किया नमस्ते
हुयी देर क्यों बदले में उन्होंने पूछा
तब मैंने अपनी व्यथा सुनाई
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
समय से निकला था मैं घर से
लेकिन बहुत देर एक ऑटो आई
बैठा जल्दी - जल्दी में मैं
कही बैठ ना जाये दूसरा कोई भाई
ऑटो चला वहाँ से
लेकिन उनसे थोड़ी देर लगायी
मेरे अलावा ऑटो के अन्दर बैठी थी एक बूढी माई
कुछ चलने के बाद उन्होंने ऑटो रुकवाई
निकाला बटुआ और दिए कुछ पैसे
ऑटो वाले ने कहा ये क्या दे रही हो
और पैसे दो माई
माई बोली और क्यों दूँ
इतनी ही अब तक मैं देती आई
ड्राइवर बोला बात सही है तेरी माई
लेकिन देखो कितनी बढ़ गयी है मंहगाई
डीजल महंगा, गैस भी महंगा
राशन वाले ने भी दाम बढ़ाई
बिजली महंगी, पानी मंहगा
शब्जी वाले ने भी रेट बढ़ाई
बस कर, बस कर ये ले पैसे
बूढी माई ने फिर मुह बनायीं
दिया पैसे फिर गिन - गिन कर
लेकिन उन्होंने बहुत देर लगायी
उनकी भी नहीं है गलती कोई
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
बॉस मेरा खामोश रहा
कुछ कहते ना उनसे बना
कहते भी मुझसे क्या
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई

Monday, October 8, 2012

माँ है तेरा आशीष बहुत



क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती  ??

माँ है तेरा आशीष बहुत 
जो हर संकट से मुझे बचाती है 

माँ तू मेरे लिए 
क्यों व्रत नए तू रखती है ??

देख के तुझको पीड़ा में 
दिल मेरा माँ रोता है 

धिक्कारता है मुझको मेरा मन 
कैसे चैन से तू सोता है ?

क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती ??

पा लेता हू जन्नत का सुख 
जब सर मेरा तू सहलाती है  

दूर हो जाती हर बाधा परेशानी 
जब गले तू मुझको लगाती है 

फिर माँ तू मेरे लिए 
क्यों व्रत नए तू रखती है ??

क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती है ??

Sunday, October 7, 2012

दोराहे पर खड़ा हूँ मैं


दोराहे पर खड़ा हूँ मैं
समझ में ना आये किधर को जाऊ
इधर को जाऊ या उधर को जाऊ
आखिर मैं किधर को जाऊ

ना कोई साथी ना हमसफ़र है
किसको मैं हमराह बनाऊ
मंजिल मेरी दूर बहुत है
और बढ़ी मुश्किल इसकी डगर है

सफ़र अकेला कटेगा कैसे
कैसे मिलेगी मंजिल मुझको

साथी मिले थे राहों में जो
किसी मोड़ पर छुट गए है
भटक गया हूँ राह मैं या
वो मुझसे रूठ गए है

एक राह में जज्बातों की
एक रहा है अरमानो की
इस दुविधा घिरा हुआ हूँ
आखिर किस राह को अपनाऊ

दोराहे पर खड़ा हूँ मैं
समझ में ना आये किधर को जाऊ
इधर को जाऊ या उधर को जाऊ
आखिर मैं किधर को जाऊ

Saturday, September 29, 2012

बंदिश-ए-जिंदगी

आज फिर शरारत करने को दिल चाहता है
बंदिश-ए-जिंदगी मगर इसकी इजाजत नहीं देती

बिताना चाहता हूँ फिर रात तारों की छाँव में
उस नीले गगन के निचे
ये छत मगर किसी और का है

झूम लेना चाहत हूँ रिमझिम बरसती फुहार में
झूठी शान-ओ-शोकत मगर इसकी इजाजत नहीं देती


रंगीनियाँ ही रंगीनियाँ है इस शहर के चप्पे - चप्पे में
इस दिले-ए-नादान से गाँव की  गलियाँ भुलाई नहीं जाती


सोचता हूँ लौट आऊं फिर उन्ही गांव की गलियों में
तमन्ना-ए-बुलंदी मगर इसकी इजाजत नहीं देती

आज फिर शरारत करने को दिल चाहता है
बंदिश-ए-जिंदगी मगर इसकी इजाजत नहीं देती

Thursday, September 6, 2012

तेरे लौट आने की आश लिए बैठा हूँ मैं


ख्याल जब भी आता है तेरा
तो मचल जाता हूँ  मै

खंजर जब चलते है तेरी यादों के
तो संभल नहीं पता हूँ मैं

ये इश्क नहीं तो और क्या है ?
क्यों पल - पल तेरे बारे में सोचता हूँ मैं

भले ही खबर ना हो तुझे
ख्वाबों में भी अक्सर आवाज लगता हूँ मैं

अगर यकीं नहीं है तो, अपनी सखियों से पूछो
तेरी गांव की गलियों में, उस पनघट किनारे
कुछ पल रोज बिताता हूँ मैं

जिंदगी जो बची है कुछ पल की
तेरी यादों में गुजरता हु मैं

ये कहते है यार मेरे
तू हो चुकी है किसी और की
मगर फिर भी
तेरे लौट आने की आश लिए बैठा हूँ मैं

Sunday, September 2, 2012

कशमकश


मेरी भी चाहत वही थी, जो तेरी ख्वाईश थी 
मचल रहे थे दो दिल अरमानो के तूफान लिए 
पर ना तुम कुछ कह सके, ना मेरे ही लब हिले 

हो रही थी बातें आँखों आँखों में

बेजुबान हम घंटों बैठे रहे, जैसे कि हो हमारे लब सिले 

छाई थी बड़ी गहरी ख़ामोशी 

इंतजार तुम्हे था मेरे कुछ कहने का, 
मै सोच रहा था कि शायद तुम कुछ कहो 

लब खामोश दिल बैचैन 

और चाहत थी कि तुम युहीं सामने बैठी रही 

फासले जो थे हमारे दरमियाँ, वो बस वक्त की जोर आजमाईश थी 

न हम कदम बढ़ा सके, ना एक कदम तुम चल सके ||

Friday, July 20, 2012

माँ सच में है तू तो महान


माँ सच में है तू तो महान, तेरे बच्चो में बसती है तेरी जान
बड़ी जतन से पाले बच्चों को, जान से भी ज्यदा रखे उनका ध्यान, 
दुःख से भरा है तेरा जीवन होठों फिर भी होता मुस्कान,
चोट लगे जब भी तेरे बच्चों को निकल जाते है तेरे प्राण,
ममता तेरी ना जो पहचान सका होगा वो कोई बड़ा ही नादान,
साया तेरा सारा साथ है हर पल छोड़ के तुझको जाऊं कहाँ मैं तेरे बिना है जग सुनसान 
होता खुदा क्या मैं क्या जानूँ तुझसे बढ़ कर नहीं कोई भगवान,
गोद में तेरी दुनियां सारी आँचल में तेरे है ये आसमान 
कैसे करूँ शब्दों में मैं तेरा गुणगान, माँ सच में है तू तो महान....!!!

Tuesday, May 1, 2012

पहले खुद को तुम बदल कर देखो

मंजिल नहीं आसान कोई,
कभी पैदल सफर बिता कर देखो

दर्द होता क्या औरो का
कभी ठोकर तुम खा कर देखो

सोना अगर है गहरी नींद में तो
मेहनत को अपना कर देखो

कीमत पता लगानी हो जो, रोटी के एक टुकड़े की तो
एक दिन भूखा बिता कर देखो

क्यूँ कहते है जल है जीवन
कभी प्यास को गले लगा कर देखो

लगेगी हर एक मुस्कान किमती
कभी आंसू अपने आँखों से बहा कर देखो

समझ आ जायेगी कीमत सच की
सच की राह अपना कर देखो

बदल जायेगी ये दुनिया लेकिन
पहले खुद को तुम बदल कर देखो 

Tuesday, April 24, 2012

तू ही मेरा सपना, तू ही मेरा ख्वाब है

तू ही मेरा सपना, तू ही मेरा ख्वाब है
जिए तू सौ साल से भी ज्यादा यही मेरा आशीर्वाद है
खुशियाँ ही खुशियाँ हो सिर्फ तेरे दमन में
मिले हर कदम पर सफलता जीवन में
दूँ मै तुझे क्या तौहफा तू तो खुद ही एक गुलाब है

तू ही मेरा सपना, तू ही मेरा ख्वाब है
जिए तू सौ साल से भी ज्यादा यही मेरा आशीर्वाद है

सूरज की तरह तू जग में छा जाये
जहाँ भी पड़े कदम तेरे वहाँ बहारें आ जाये
समय ऐसा कभी न आये
जब तेरा चेहरा जरा भी मुरझाये
खुश रहे तू सदा और सदा खुशिया ही फैलाये
दिन ये जीवन तेरे बार बार आये
पुरे हो सरे, जो भी तेरा अरमान है

तू ही मेरा सपना, तू ही मेरा ख्वाब है
जिए तू सौ साल से भी ज्यादा  यही मेरा आशीर्वाद है

मुश्किलें तो जीवन में आती ही रहती है
हिम्मत से करे मुकाबला वही सच्चा इंसान है
रुकावटे तेरे दमन में आये कभी ना
बहा दूँमै लहू अपना वहाँ , जहाँ तेरा निकले पसीना
तुझ पे तो ये मेरा जीवन कुर्बान है
हम सबका प्यारा तू हम सब की जान है
तू ही मेरा सपना, तू ही मेरा ख्वाब है 

Friday, March 23, 2012

हम बिहारी है....!!


जन्म लिया इस गौरवमयी धरती पर,
इसके हम आभारी है,

न कोई शर्म, न लज्जा कहने में,
कि हम बिहारी है,

रहूँ चाहे दुनिया के किसी कोने में,
नहीं भूलूँगा कि हम संतान तुम्हारी है......
गोद में तेरे बचपन बिता,
आँचल तले आई जवानी है,
देख के तेरी ऐसी हालत,
आँखों भर आई पानी है,
जन्म दिया और पला-पोसा,
माँ का हर फर्ज़ तुने निभाई है,
अब बारी हमारी है,

न कोई शर्म, न लज्जा कहने में,
कि हम बिहारी है,

मान हमारी, सम्मान हमारी,
माँ तू तो है अभिमान हमारी,
तेरे चरणों में अर्पण है,
ये जीवन और जान हमारी,

न कोई शर्म, न लज्जा कहने में,
कि हम बिहारी है,

धुल तेरे चरणों की,
अपने मस्तक पर हम सजायेंगे,
खो रही जो तेरी गरिमा,
वापस उसे हम लायेंगे,
है कसम हमे इस मिट्टी की,
एक ने बिहार हमे बनानी है.

न कोई शर्म, न लज्जा कहने में,
कि हम बिहारी है,

Thursday, March 15, 2012

ये इश्क़ नहीं तो और क्या है....??

ख्याल जब भी आता है तेरा 
मचल जाता हूँ मैं

खंजर जब चलते है तेरी यादों के
संभल नहीं पता हु मैं

ये इश्क नहीं तो और क्या है...??
क्यों पल - पल तेरे बारे में सोचता हूँ मैं...??

भले ही खबर ना हो तुझे
ख्वावों में भी अक्सर आवाज लगता हूँ मैं
अगर तकिन नहीं तो अपनी सखियों से पूछ लो
तेरी गाँव की गलियों में, उस पनघट किनारे
कुछ पल राज बिताता हूँ मैं


जिंदगी जो बची है कुछ पल की 
तेरी यादों में गुजरता हूँ मैं 


ये कहते है यार मेरे
तू हो चुकी किसी और की
मगर फिर भी
तेरे लौट आने की आश लिए बैठा हूँ मैं


ये इश्क नहीं तो और क्या है....??

Thursday, March 8, 2012

क्या तुम्हरी औकात है......??


औरत अगर खामोश है,
मत समझो किया उसने कोई अपराध है,

है इस दुनिया जो कोई अस्तित्व तुम्हारा,
ये बस उसका ही प्रताप है,
मांगे दुआए तेरे लिए और रखती उपवास है,
दिया जन्म सह कर असह प्रसव पीड़ा,
खून से अपने तेरा बचपन सिंचा,
क्या यही उसका गुनाह है..........???

जरा सोच कर देखो अपने मन में,
इसके बिना क्या तुम्हरी औकात है......??

औरत अगर खामोश है,
मत समझो किया उसने कोई अपराध है,

माँ अगर एक रूप है इसका तो,
अवतार भी है ये काली का.....
अबला न समझो इसको,
खींचों नहीं अब कोई लक्ष्मण रेखा,
रानी चेनम्मा और लक्ष्मी बाई की कौसल सारी दुनिया ने देखा है,

मत कैद करो घर की चारदीवारी में,
जैसे की कोई करावाश है,
करना अवहेलना नारी जाती की
पुरे मानवता का अपमान है,
जननी है ये सारी दुनिया की,
सबसे ऊँचा इसका स्थान है,

औरत अगर खामोश है,
मत समझो किया उसने कोई अपराध है,

Tuesday, February 21, 2012

पैसा

ये दुनिया बस है पैसों का खेल
कहते है, पैसा तो है हांथो का मैल
मैल कहाँ रह पता है सदा
धुल जाता है इक पल में
साबुन पानी जो लगे जरा
कितना इस पर इतरोगे
तुम कब तक नहीं नहाओगे
मैल अधिक जम जाये तो
जिस्म भी छलनी हो जाता है
क्यों इसके पीछे भाग रहे
नाते रिश्ते सब त्याग रहे
जोड़ - जोड़ कर इक पैसा
तुने अम्बार लगाया है
गैर तो गैर इस पैसे के लिए
अपनों तक खून बहाया है
लेकिन क्या कभी चैन की नींद सो पाया है ?
अब तक जो भी कमाया है
चैन सुकून जिसके लिए गवाया है
कुछ न साथ जायेगा
सब यहीं रह जायेगा
तेरे बाद औरो को लड़वायेगा
इस पैसे का यही खेल
हाँथ को अपने धोते रहो
अगर ये है हांथो का मैल

Thursday, February 16, 2012

अगर तुम मेरे हो तो...............

वक्त ने जो पैदा किया है दूरियां
असर इसका न मुझ पर पाओगे
कोशिश हम करते रहेंगे तुम्हे बुलाने की
अगर तुम मेरे हो तो न चाहते हुए ही लौट आओगे

फुर्सत जो मिले कभी जरा भी
या महसूस हो कमी किसी अपने की
आँख बंद करके देखना
सबसे करीब तुम हमे ही पाओगे

हमने किया है वादा साथ निभाएंगे उम्र भर
दो कदम चल कर तुम कैसे दूर हो जाओगे
हम तो है साया तुम्हरा
दूर हमसे तो चले जाओगे
मगर अपने साये से पीछा कैसे छुराओगे

फिर भी तुम्हे अगर हम पा ना सके तो
नज्म बन कर तेरे लबों पर बस जायेंगे
किसी और के लिए ही सही
नगमा कभी तो कोई गुनगुनाओगे

कोशिश हम करते रहेंगे तुम्हे बुलाने की
अगर तुम मेरे हो तो न चाहते हुए ही लौट आओगे

Sunday, January 29, 2012

बनावटी हो गयी ये दुनिया

बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??
बनावटी है मंजिले
बनावटी है रास्ते
और सपनो में भी बनावटपन आ गया..
बनावटी है दोस्ती
बनावटी है रिश्ते
और प्यार में भी बनावटपन छा गया
बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??
बनावटपन ने लुटा न जाने कितने दिलो को....??
बनावटपन ने लुटा न जाने कितने घरो को......??
बनावटपन ने बर्बाद कर दिया , न जाने कितने जीवन को...??
बनावटी है भक्ति,
बनावटी है शक्ति,
और बिश्वास में भी बनावटपन आ गया
बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??
बनावटपन का खंजर
असलीय का खून कर
बदल रहा है हर एक मंजर
बनावटी इस दुनिया के बावती है लोग
बनावटपन फ़ैल रहा, फैलता है जैसे कोई रोग
बनावटी मै नहीं था........
बनाव्त्पन का हुआ ऐसे असर
कि मै भी बनावटी हो गया
बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??
बनावटी इस दुनिया में हर कोई बनावटी हो गया
बिश्वास का जो धागा था
बनावटपन ने तोड़ दिया
बनावट का ऐसा असार छा गया
जिंदगी का रुखही बनावटपन ने मोड़ दिया
बनावटी रोग कि बनावटी दवा बनी
और दुआओं में भी बनावटपन आ गया
बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??

ये जीवन तो नश्वर है, इसका क्या मै अभिमान करू

ये जीवन तो नश्वर है,
इसका क्या मै अभिमान करू??
सार्थक ये हो सकता है
अगर जनहित में श्रमदान करूँ.....
अंधकार बहुत है इस दुनिया में,
क्यों न किसी घर का रोशनदान बनूँ .....
माना दुनिया मै बदल सकता नहीं,
कोशिश है कि दो चेहरों पे मै मुस्कान भरूँ......
सच की मै राह चलूँ......
सच का ही मै गुणगान करूँ......
काम करूँ मै कुछ ऐसा
जिससे एक अच्छा इंसान बनूँ......
बेबश और लाचारों का जिससे मै अभिमान बनूँ.....
हिंदू, मुसिलिम हो या सीख ईसाई
गुजरती मराठी हो या बंगाली बिहारी,
कोई भी अलग कैसे है?
जब खुद को माँ भारती की संतान कहूँ
ये जीवन तो नश्वर है,
इसका क्या मै अभिमान करूँ ??

Thursday, January 26, 2012

कैसा ये नाता है या रिश्ता नया है कोई.....???


ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी
कैसा ये नाता है या रिश्ता नया है कोई
ना तुझको देखा है मेने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी
कोई मुझे दो बता होता है ऐसा भी क्या कभी ..??

नाम तेरा लिख लिख कर मिटाता रहूँ
बनाता हूँ मैं हर तेरी तस्वीर एक नयी
तेरे ख्यालों में खोया रहूँ
न जाने क्यों था मुझको यकीं
मिल जायेगी तू मुझको कहीं ना कहीं
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी

पहली है ये मुलाकात अपनी
फिर तुम लगते नहीं अजनबी
मुझको तो लगता है ऐसा
जैसे बरसों से है हम साथ यहीं
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने क्यों एक सूरत तेरी इस दिल में बस गयी  

मिल के तुझ से लगा मुझे
जैसे दुनिया ही बदल गयी हो मेरी
तेरी ही ही थी तलाश मुझे
थी तुझ बिन अधूरी मेरी जिंदगी
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी


Tuesday, January 24, 2012

मेरी मईया

कहाँ  गयी मुझे छोड़ के
छोड़ के गयी कहाँ मेरी मईया
तेरी याद आती है
मुझे बहुत रुलाती है ..........
आजा ............. आजा लौट के आजा माँ ..........
भूखा हूँ तब से तू दूर गयी जब से
भूख कहाँ मिटेगी मेरी
बिना तेरे हाथो के रोटी के मेरी मइया .......
कहाँ  गयी मुझे छोड़ के
छोड़ के गयी कहाँ मेरी मईया ..............
जागूं  मैं सारी सारी  रात
याद करूँ ममता वाला तेरा हाथ ......
नींद मुझे कहाँ आती है .........
बिना तेरी मीठी लोरी के, मेरी मईया ..........
कहाँ  गयी मुझे छोड़ के
छोड़ के गयी कहाँ मेरी मईया..............
कैसे रहूँ तेरे बिन मइया
मैं तो हु एक बालक ........
माँ जरा आके देख क्या हो गयी मेरी हालत ......
तू दूर  गयी माँ जब से
जग दूर हुआ है तब से ..........
जहाँ बचपन गुजरे, वो  गाँव ....
तेरी आँचल की माँ छाँव ..........
मुझे जब भी याद आती है ...............
मुझे खूब  रुलाती  है ...........
तेरी याद आती है ...........
मईया याद आती बहुत याद आती है ......

Sunday, January 22, 2012

याद बहुत आई तेरी

आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी
याद आई गोद तेरी
जब मैं परेशान होता था
सर रख के गोद में तेरी मैं
आँखे मूँद कर सो जाता था
सर को मेरे सहला कर
तू मुझको समझाती थी
बालों में फेर कर ऊँगली
माँ मुझको तू सुलाती थी

आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी
तेरे आँचल की निर्मल छांव में 
धुप कड़ी भी बीत गयी
लेकिन आज मेरी माँ
लाल तेरा है फिर परेशान
ढूढता फिर गोद तेरी
सर रख कर दो पल सोने को
तेरी आँचल को ढुंढुं  मैं
हाल बता कर रोने को
आज हूँ इतना दूर मैं तुझसे
साया भी ना दिख पाता है
सच कहता हूँ मेरी माँ
तेरे शिवा मुझे
कोई नहीं समझ पाता है

आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी

Wednesday, January 18, 2012

दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं

दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,
दिल तो एक शीशा है, ठोकर नहीं सह सकता है,
ठोकर लगे टूट कर चूर हो जाता है,
दिल तो एक मंदिर है,
इसकी मूरत बना कर तुमको पूजा था,
इस मंदिर के देवता ने ही मंदिर को फूंक डाला,
शीशा जो टूटे अगर थोड़ी सी होती आवाज भी,
दिल के टूटने पर होती नहीं आवाज कोई,
दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,
दीवाना था ये दिल जो तुझसे मुहब्बत कर बैठा,
दुनियां के रस्मों से अनजान, खुद से बगाबत कर बैठा,
दुनिया की इन टेढ़ी-मेढ़ी राहों पर चलने की हिमाकत कर बैठा,
ठोकर लगी तो समझा, ये दुन्याँ नहीं दीवानों की,
दीवानगी केलिए यहाँ कोई जगह नहीं,
दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,
जिसपे भी किया भरोसा, उसने ही दिया धोखा,
मुझे धोखा देने वाले, क्या दिल तेरे पास नहीं.....??
फिर क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,
जब तू था पास मेरे, तो लगती थी दुनिया बड़ी हसीं,
अब तो तुझसे मिलने की भी बाकि कोई आस नहीं,
नादान था ये दिल, नादानी की सजा मिल गयी,
समझाया बहुत इस दीवाने को,
इसको तो मुझे जरा भी था विश्वास नहीं,
दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,

Sunday, January 15, 2012

कैसे भूल पाउँगा......!!!

कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को
पल जो सुहाने थे, वो गुजरे ज़माने है जो
कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को

दिन वो भरे थे जिनमे मस्ती
हर पल जिनमे मिलती थी बस खुशी
मिलते थे जभी हू आप कभी
बिखरती थी बस हंसी ही हंसी
फिर क्यों छाई है आज ये उदासी
कैसे लौटा पाउँगा मै उन मुस्कुराहटों को
कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को
याद आते हैं वो मस्ती भरे दिन
मस्ती भरे दिन वो शरत भरी रातें
वो तेरी बातें, वो तेरी यादें
वो तेरा मुस्कुराना, वो तेरा चलना
वो हंस-हंस कर तेरा बातें करना
वो रूठ कर तेरा खुद मान जाना
कैसे भूल पाऊंगा तेरी आँखों के कातिलाना अदाओं को

दिल की है ये आरजू


दिल की है ये आरजू की तुझको मैं पा सकूँ
बात  जो मेरे मन में है, वो तुझको मैं बता सकूँ
रहूँ मैं पास तेरे या तुझसे दूर रहूँ
बस हर पल मैं तेरे यादों के साथ रहूँ
जिंदगी है एक सफर हंसके इसको काट लूँ
चाहे सुख-दुःख जो मिले तेरे संग मै बाँट लूँ
तू जो साथ चले तो हर ठोकर को मै सहूँ
तू जो साथ दे तो हर मुसीबत से मै लडूं
तेरे ही सहारे मै जिंदगी गुजार  दूँ
जितना  तुमने सोचा न हो कभी उतना मै तुझे प्यार दूँ
तेरी एक मुस्कान पर मै अपनी हंसी वार दूँ
तेरी खुशियों ले खातिर अपना जीवन वार दूँ
दिल की है ये आरजू की तुझको मै पा सकूँ
बात जो मेरे मन में है वो तुझको मै बता सकूँ
दिल की है ये आरजू की तुझको मै पा सकूँ

यादें

 यादों के सफर में चलते हैं
यादों के सहारे जीते हैं
आँखों से निकले आंसुओं को
पानी समझ कर पीते हैं
रहता हूँ भले ही मैं कहीं
तेरी यादें ही साथ होती है
तन्हाईओं अकसर आँखें मेरी रोतीं हैं
तेरी यादें ही तो मेरे जीवन की ज्योति है
यादें........ यादें....... यादें....... ये यादें......!!!

याद आते हैं दिन वो
गुजरे थे साथ हमने जो
मिलते थे हम जिस तरह
खिलते फूलों की तरह
तेरी यादें ही तो है
मेरे जीने की वजह
यादों से तेरी मिलती है
कभी खुशी तो गम कभी
यादों से आती है हंसी कभी
तो होती है आँखे नम भी है
कैसे बताये हम तुझे
तेरे बिना कैसे जीते हैं
आँखों से निकले आंसुओं को
पानी समझ कर पीते हैं
यादों के सफर में चलते हैं
यादों के सहारे जीते हैं
यादें........ यादें....... यादें....... ये यादें......!!!

यादों में आते हैं
दिन वो जो सुहाने होते थे
साथ में जब हम हँसते थे
कन्धों पर सर रख कर रोते थे
याद कर बीती बातों को
सारी सारी रात  जागते हैं
आँखों से निकले आंसुओं को
पानी समझ कर पीते हैं
यादों के सफर में चलते हैं
यादों के सहारे जीते हैं
यादें........ यादें....... यादें....... ये यादें.......!!!

प्यार तुमसे हो गया

प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया
प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया
प्यार हो गया, मेरा दिल कहीं खो गया
यार यार यार यार तुम सा मिल गया
यार यार यार यार तुम सा मिल गया 
प्यार हो गया मुझे यार मिल गया

प्यार हो गया जब से, मेरी जिंदगी सवंर गयी 
जिंदगी सवंर गयी, मुझे हर ख़ुशी मिल गयी
साथी मिला जो तुमसा, मेरी जिंदगी बदल गयी 
आ वादा करे मिल के न होंगे जुदा कभी 
साथ निभायेगे हम सारी जिंदगी 
चाहे ख़ुशी हो या गम की घडी 
देखा जब से तुझको दिल ये बेकरार हो गया 
प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया 
यार यार यार यार तुम सा मिल गया


हाँथों में हाँथ हो, तू मेरे साथ हो 
फिर दुनिया की परवाह ही क्या...??
बांहों में तेरी दुनिया है मेरी 
दिल में तेरे मेरा ठिकाना 
रहेंगे हम साथ, चाहे कुछ भी करले जमाना 
क्योंकि............
प्यार प्यार प्यार प्यार तुमसे हो गया 
यार यार यार यार तुम सा मिल गया


Saturday, January 14, 2012

कैसे कहूँ क्या हूँ मैं

कैसे  कहूँ  क्या  हूँ  मैं .
मुझको  खुद  ये  नहीं  है  पता .
हूँ  अकेला  इस  दुनिया  के  भीड़  में,
एक  साथी  हूँ ढूंढता,
चाँद  तारों  की  तमन्ना  नहीं 
न  महलो  में  मैं  रहना  चाहता 
न  पता  है  कोई  न  ठिकाना  मेरा,
बस  दिलों  में  ही  मैं  रहना  चाहता,
दिलों में  ही  रहना  चाहता.
कैसे  कहूँ  क्या  हूँ मैं.
मुझको  खुद  ये  नहीं  है  पता 

जिंदगी  एक  सफ़र  है 
और  मुसाफिर  हूँ  मैं  मंजिल  बड़ी  दूर  है 
और  मुश्किल  है  रास्ता.
तनहा  ये  राह  काटता  नहीं 
हमसफ़र  हूँ  मई  चाहता,
कैसे  कहूँ  क्या  हूँ  मैं.
मुझको  खुद  ये  नहीं  है  पता

मेरा गाँव

याद आता है मेरा बचपन 
याद आते है वो जीवन 
हरयाली ही हरयाली थी चारो तरफ 
उन खेतों में ही बसा है अब तक मेरा मन 
जब खेतों में हल चल करते थे 
हम पीछे पीछे दौड़ा करते थे 
माँ-बाबा बिज थे बोते 
हम मिटटी के घरौंदे बनाया करते थे
जब से हम परदेश में आये
सपना बन गया वो मंजर 
याद आता है मेरा बचपन
याद आते है वो जीवन


जब कभी बागों में जाना 
दुसरोके बाघ से आम चुराना
खुद के बाग़  से कुछ न लाना 
कभी बच के निकल जाते तो 
कभी पकडे जाने पर 
रोने का झूठा बहाना करना
ये सब लगता है आब एक सपना 
कितना प्यारा था वो गाँव अपना 
ईद, दिवाली, होली पावन
मिल कर मानते थे सब हम
याद जब आती है उन लम्हों की 
आँखे हो जाती है नम
याद आता है मेरा बचपन 
याद आता है वो जीवन
 

Thursday, January 12, 2012

माँ मुझको क्षमा कर देना

माँ मुझको क्षमा कर देना
वक़्त तुझे नहीं दे पता हूँ
चला मैं करने सेवा लोगों की
पर तेरे लिए नहीं कुछ कर पता हूँ
खुश रहने का तू देती मुझे आशीष सदा
पर खुशिया तुझे नहीं दे पता हूँ


माँ मुझको क्षमा कर देना
वक़्त तुझे नहीं दे पता हूँ
जब मैं था छोटा सा
पास रह कर तुझे सताता था
पाल -पोस कर मुझे बड़ा किया
फिर भी साथ तेरे नहीं रह पता हूँ

माँ मुझको तू क्षमा कर देना
वक़्त तुझे नहीं दे पता हूँ

रहता हूँ मैं ऊँचे माकानों में
तेरे ममता भरी आँचल के
छांव में नहीं रहा पता हूँ
याद बहुत सताती है जब......
चुपके से आंसू बहता हूँ


माँ मुझको क्षमा कर देना
वक़्त तुझे नहीं दे पता हूँ
चला मैं करने सेवा लोगों की
पर तेरे लिए नहीं कुछ कर पता हूँ
खुश रहने का तू देती मुझे आशीष सदा
पर खुशिया तुझे नहीं दे पता हूँ

Tuesday, January 10, 2012

माँ

तेरा ही मै गुणगान करूँ
हर पल माँ तुझे प्रणाम करूँ
मिला तुझसे है ये जीवन
तू  ही जन्मदाता  मेरी,
तू  ही मेरी भाग्यविधाता
मेरी हर सांसों पर
तेरा ही बस तेरा अधिकार है मेरी माँ
ये तन मन और ये जीवन
मिला है तुझसे
तेरे चरणों  में  है अर्पण
तेरे ही आज्ञां से चलती है
मेरे दिल की हर धड़कन 
आँख मूंद के, बिना कुछ पूछे
हर आज्ञां तेरी स्वीकार है माँ
होगा वो अपराध अगर
तुझसे कोई सवाल करूँ
हर पल तुझे प्रणाम करूँ
तेरा ही गुणगान करूँ
क्यों जाऊ मै
मंदिर और शिवालय
क्यों मै कोई दिखावा करूँ
पूजा होगी वो सबसे बड़ी
दो पल भी जो इन चरणों की सेवा करूँ.........
हर पल तुझे प्रणाम करूँ
बस तुझको ही मै ध्यान करूँ