Friday, January 25, 2013

बेटी है तो कल है

माँ, बीवी और बहन है बेटी
घर - आँगन और जीवन जो महका देती
सुगन्धित फूलों का वो उपवन है बेटी


















कली सी कोमल, फूलों सी नाजुक
प्रकृति का अनमोल सृजन है बेटी

नीरस से वीरान जीवन में
सुर की गंगा जो बहा देती
सात सुरों का सरगम है बेटी

जब छाता जीवन घनघोर अँधेरा
और नजर न आती रह कोई
तब उम्मीद की आखिरी किरण है बेटी

दुःख संताप की कठिन घडी में
मुस्काता दर्पण है बेटी

बिन बेटी संभव नहीं है
कर पाना इस सृष्टि की कल्पना
बीज अंकुरित होता जहाँ से जीवन का
वो धरा वो गगन है बेटी

बोझ नहीं ये पाप नहीं
जन्म जन्मों के शुभ कर्मों ये तो फल है
बेटी है तो कल है
बेटी है तो कल है

Thursday, January 24, 2013

बेटी नहीं अभिशाप है


क्या कुसूर है उस नन्ही सी जान का ??
उसका तो नहीं अभी इस दुनिया में जान पहचान का














दे रहे हो उसे सजा किस बात की ??
उसे तो जरुरत है तुम्हारे ममता  भरे हाँथ की

खुद पर करो थोड़ी सी  शर्म
उस नन्ही जान पर करो कुछ तो रहम

दो मौका इसे पलने बढ़ने का
ये तो है एक नन्ही कली
दो मौका इसे खिलने का

आज बगिया तुम्हारी महकाएगी
कल एक नयी दुनिया को भी सजाएगी

जग में जो ये आ जाएगी
तो तेरा ही मान बढ़ाएगी

पहुचेगी कोई चाँद पर तो
तो कोई हिमालय पर तिरंगा लहराएगी

बेटी नहीं अभिशाप है
जीवनचक्र की एक शाख है

देखा नहीं उसने तो अभी चेहरा आज का
क्यों बना रहे उसे तुम पन्ना इतिहास का