Saturday, August 8, 2015

क्या हुआ अगर हम मुस्कुरा न सकें....


तुझे इल्जाम दूँ कैसे मेरी जिंदगी
जरूर कमी मुझ में ही रही होगी ।।

यूँ बेवजह तो ठोकर लगा करती नहीं
जरूर आँखें मेरी ही बंद रही होंगी ।।

तू मुझसे जुदा हो गयी
या कोई और तेरे करीब आ गया,
इसमें खता तेरी नहीं
जरूर मैं ही तुझे अपना बना न सका ।।

हँसती - खिलखिलाती रहे तू खुदा करे
क्या हुआ जो हम मुस्कुरा न सके ।।

Friday, July 17, 2015

मुझे अपने पास बुला ले माँ

तन्हा बहुत हूँ तेरे बिना,
आकर गले लगा ले माँ ।।

रह ना सकूँ दूर अब मैं तुझसे,
मुझे आँचल में छुपा ले माँ ।।

सोई नहीं वर्षों से मेरी आँखें,
मुझे गोद में अपने सुला ले माँ।।

कमी नहीं कुछ, फिर भी भूख हूँ मैं,
रुखा - सुखा ही सही अपने हांथों से कुछ खिला दे माँ ।।

भूल हुई जो दूर मैं आया,
मेरी भूल को तू भुला दे माँ ।।

दौलत - शौहरत की नहीं चाह मुझे अब,
बस अपने पास बुला ले माँ ।।
मुझे अपने पास बुला ले माँ.........।।