Sunday, January 29, 2012

बनावटी हो गयी ये दुनिया

बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??
बनावटी है मंजिले
बनावटी है रास्ते
और सपनो में भी बनावटपन आ गया..
बनावटी है दोस्ती
बनावटी है रिश्ते
और प्यार में भी बनावटपन छा गया
बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??
बनावटपन ने लुटा न जाने कितने दिलो को....??
बनावटपन ने लुटा न जाने कितने घरो को......??
बनावटपन ने बर्बाद कर दिया , न जाने कितने जीवन को...??
बनावटी है भक्ति,
बनावटी है शक्ति,
और बिश्वास में भी बनावटपन आ गया
बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??
बनावटपन का खंजर
असलीय का खून कर
बदल रहा है हर एक मंजर
बनावटी इस दुनिया के बावती है लोग
बनावटपन फ़ैल रहा, फैलता है जैसे कोई रोग
बनावटी मै नहीं था........
बनाव्त्पन का हुआ ऐसे असर
कि मै भी बनावटी हो गया
बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??
बनावटी इस दुनिया में हर कोई बनावटी हो गया
बिश्वास का जो धागा था
बनावटपन ने तोड़ दिया
बनावट का ऐसा असार छा गया
जिंदगी का रुखही बनावटपन ने मोड़ दिया
बनावटी रोग कि बनावटी दवा बनी
और दुआओं में भी बनावटपन आ गया
बनावटी हो गयी ये दुनिया
बनावटपन का घोर अँधेरा छा गया
इस बनावटी दुनिया में, न जाने मै कहा खो गया...??

ये जीवन तो नश्वर है, इसका क्या मै अभिमान करू

ये जीवन तो नश्वर है,
इसका क्या मै अभिमान करू??
सार्थक ये हो सकता है
अगर जनहित में श्रमदान करूँ.....
अंधकार बहुत है इस दुनिया में,
क्यों न किसी घर का रोशनदान बनूँ .....
माना दुनिया मै बदल सकता नहीं,
कोशिश है कि दो चेहरों पे मै मुस्कान भरूँ......
सच की मै राह चलूँ......
सच का ही मै गुणगान करूँ......
काम करूँ मै कुछ ऐसा
जिससे एक अच्छा इंसान बनूँ......
बेबश और लाचारों का जिससे मै अभिमान बनूँ.....
हिंदू, मुसिलिम हो या सीख ईसाई
गुजरती मराठी हो या बंगाली बिहारी,
कोई भी अलग कैसे है?
जब खुद को माँ भारती की संतान कहूँ
ये जीवन तो नश्वर है,
इसका क्या मै अभिमान करूँ ??

Thursday, January 26, 2012

कैसा ये नाता है या रिश्ता नया है कोई.....???


ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी
कैसा ये नाता है या रिश्ता नया है कोई
ना तुझको देखा है मेने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी
कोई मुझे दो बता होता है ऐसा भी क्या कभी ..??

नाम तेरा लिख लिख कर मिटाता रहूँ
बनाता हूँ मैं हर तेरी तस्वीर एक नयी
तेरे ख्यालों में खोया रहूँ
न जाने क्यों था मुझको यकीं
मिल जायेगी तू मुझको कहीं ना कहीं
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी

पहली है ये मुलाकात अपनी
फिर तुम लगते नहीं अजनबी
मुझको तो लगता है ऐसा
जैसे बरसों से है हम साथ यहीं
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने क्यों एक सूरत तेरी इस दिल में बस गयी  

मिल के तुझ से लगा मुझे
जैसे दुनिया ही बदल गयी हो मेरी
तेरी ही ही थी तलाश मुझे
थी तुझ बिन अधूरी मेरी जिंदगी
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी


Tuesday, January 24, 2012

मेरी मईया

कहाँ  गयी मुझे छोड़ के
छोड़ के गयी कहाँ मेरी मईया
तेरी याद आती है
मुझे बहुत रुलाती है ..........
आजा ............. आजा लौट के आजा माँ ..........
भूखा हूँ तब से तू दूर गयी जब से
भूख कहाँ मिटेगी मेरी
बिना तेरे हाथो के रोटी के मेरी मइया .......
कहाँ  गयी मुझे छोड़ के
छोड़ के गयी कहाँ मेरी मईया ..............
जागूं  मैं सारी सारी  रात
याद करूँ ममता वाला तेरा हाथ ......
नींद मुझे कहाँ आती है .........
बिना तेरी मीठी लोरी के, मेरी मईया ..........
कहाँ  गयी मुझे छोड़ के
छोड़ के गयी कहाँ मेरी मईया..............
कैसे रहूँ तेरे बिन मइया
मैं तो हु एक बालक ........
माँ जरा आके देख क्या हो गयी मेरी हालत ......
तू दूर  गयी माँ जब से
जग दूर हुआ है तब से ..........
जहाँ बचपन गुजरे, वो  गाँव ....
तेरी आँचल की माँ छाँव ..........
मुझे जब भी याद आती है ...............
मुझे खूब  रुलाती  है ...........
तेरी याद आती है ...........
मईया याद आती बहुत याद आती है ......

Sunday, January 22, 2012

याद बहुत आई तेरी

आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी
याद आई गोद तेरी
जब मैं परेशान होता था
सर रख के गोद में तेरी मैं
आँखे मूँद कर सो जाता था
सर को मेरे सहला कर
तू मुझको समझाती थी
बालों में फेर कर ऊँगली
माँ मुझको तू सुलाती थी

आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी
तेरे आँचल की निर्मल छांव में 
धुप कड़ी भी बीत गयी
लेकिन आज मेरी माँ
लाल तेरा है फिर परेशान
ढूढता फिर गोद तेरी
सर रख कर दो पल सोने को
तेरी आँचल को ढुंढुं  मैं
हाल बता कर रोने को
आज हूँ इतना दूर मैं तुझसे
साया भी ना दिख पाता है
सच कहता हूँ मेरी माँ
तेरे शिवा मुझे
कोई नहीं समझ पाता है

आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी

Wednesday, January 18, 2012

दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं

दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,
दिल तो एक शीशा है, ठोकर नहीं सह सकता है,
ठोकर लगे टूट कर चूर हो जाता है,
दिल तो एक मंदिर है,
इसकी मूरत बना कर तुमको पूजा था,
इस मंदिर के देवता ने ही मंदिर को फूंक डाला,
शीशा जो टूटे अगर थोड़ी सी होती आवाज भी,
दिल के टूटने पर होती नहीं आवाज कोई,
दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,
दीवाना था ये दिल जो तुझसे मुहब्बत कर बैठा,
दुनियां के रस्मों से अनजान, खुद से बगाबत कर बैठा,
दुनिया की इन टेढ़ी-मेढ़ी राहों पर चलने की हिमाकत कर बैठा,
ठोकर लगी तो समझा, ये दुन्याँ नहीं दीवानों की,
दीवानगी केलिए यहाँ कोई जगह नहीं,
दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,
जिसपे भी किया भरोसा, उसने ही दिया धोखा,
मुझे धोखा देने वाले, क्या दिल तेरे पास नहीं.....??
फिर क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,
जब तू था पास मेरे, तो लगती थी दुनिया बड़ी हसीं,
अब तो तुझसे मिलने की भी बाकि कोई आस नहीं,
नादान था ये दिल, नादानी की सजा मिल गयी,
समझाया बहुत इस दीवाने को,
इसको तो मुझे जरा भी था विश्वास नहीं,
दिल तोड़ने वाले क्यों तुझको ये अहसास नहीं,
टूटे हुए दिल में रहती कोई आस नहीं,

Sunday, January 15, 2012

कैसे भूल पाउँगा......!!!

कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को
पल जो सुहाने थे, वो गुजरे ज़माने है जो
कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को

दिन वो भरे थे जिनमे मस्ती
हर पल जिनमे मिलती थी बस खुशी
मिलते थे जभी हू आप कभी
बिखरती थी बस हंसी ही हंसी
फिर क्यों छाई है आज ये उदासी
कैसे लौटा पाउँगा मै उन मुस्कुराहटों को
कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को
याद आते हैं वो मस्ती भरे दिन
मस्ती भरे दिन वो शरत भरी रातें
वो तेरी बातें, वो तेरी यादें
वो तेरा मुस्कुराना, वो तेरा चलना
वो हंस-हंस कर तेरा बातें करना
वो रूठ कर तेरा खुद मान जाना
कैसे भूल पाऊंगा तेरी आँखों के कातिलाना अदाओं को

दिल की है ये आरजू


दिल की है ये आरजू की तुझको मैं पा सकूँ
बात  जो मेरे मन में है, वो तुझको मैं बता सकूँ
रहूँ मैं पास तेरे या तुझसे दूर रहूँ
बस हर पल मैं तेरे यादों के साथ रहूँ
जिंदगी है एक सफर हंसके इसको काट लूँ
चाहे सुख-दुःख जो मिले तेरे संग मै बाँट लूँ
तू जो साथ चले तो हर ठोकर को मै सहूँ
तू जो साथ दे तो हर मुसीबत से मै लडूं
तेरे ही सहारे मै जिंदगी गुजार  दूँ
जितना  तुमने सोचा न हो कभी उतना मै तुझे प्यार दूँ
तेरी एक मुस्कान पर मै अपनी हंसी वार दूँ
तेरी खुशियों ले खातिर अपना जीवन वार दूँ
दिल की है ये आरजू की तुझको मै पा सकूँ
बात जो मेरे मन में है वो तुझको मै बता सकूँ
दिल की है ये आरजू की तुझको मै पा सकूँ

यादें

 यादों के सफर में चलते हैं
यादों के सहारे जीते हैं
आँखों से निकले आंसुओं को
पानी समझ कर पीते हैं
रहता हूँ भले ही मैं कहीं
तेरी यादें ही साथ होती है
तन्हाईओं अकसर आँखें मेरी रोतीं हैं
तेरी यादें ही तो मेरे जीवन की ज्योति है
यादें........ यादें....... यादें....... ये यादें......!!!

याद आते हैं दिन वो
गुजरे थे साथ हमने जो
मिलते थे हम जिस तरह
खिलते फूलों की तरह
तेरी यादें ही तो है
मेरे जीने की वजह
यादों से तेरी मिलती है
कभी खुशी तो गम कभी
यादों से आती है हंसी कभी
तो होती है आँखे नम भी है
कैसे बताये हम तुझे
तेरे बिना कैसे जीते हैं
आँखों से निकले आंसुओं को
पानी समझ कर पीते हैं
यादों के सफर में चलते हैं
यादों के सहारे जीते हैं
यादें........ यादें....... यादें....... ये यादें......!!!

यादों में आते हैं
दिन वो जो सुहाने होते थे
साथ में जब हम हँसते थे
कन्धों पर सर रख कर रोते थे
याद कर बीती बातों को
सारी सारी रात  जागते हैं
आँखों से निकले आंसुओं को
पानी समझ कर पीते हैं
यादों के सफर में चलते हैं
यादों के सहारे जीते हैं
यादें........ यादें....... यादें....... ये यादें.......!!!

प्यार तुमसे हो गया

प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया
प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया
प्यार हो गया, मेरा दिल कहीं खो गया
यार यार यार यार तुम सा मिल गया
यार यार यार यार तुम सा मिल गया 
प्यार हो गया मुझे यार मिल गया

प्यार हो गया जब से, मेरी जिंदगी सवंर गयी 
जिंदगी सवंर गयी, मुझे हर ख़ुशी मिल गयी
साथी मिला जो तुमसा, मेरी जिंदगी बदल गयी 
आ वादा करे मिल के न होंगे जुदा कभी 
साथ निभायेगे हम सारी जिंदगी 
चाहे ख़ुशी हो या गम की घडी 
देखा जब से तुझको दिल ये बेकरार हो गया 
प्यार प्यार प्यार प्यार तुम से हो गया 
यार यार यार यार तुम सा मिल गया


हाँथों में हाँथ हो, तू मेरे साथ हो 
फिर दुनिया की परवाह ही क्या...??
बांहों में तेरी दुनिया है मेरी 
दिल में तेरे मेरा ठिकाना 
रहेंगे हम साथ, चाहे कुछ भी करले जमाना 
क्योंकि............
प्यार प्यार प्यार प्यार तुमसे हो गया 
यार यार यार यार तुम सा मिल गया


Saturday, January 14, 2012

कैसे कहूँ क्या हूँ मैं

कैसे  कहूँ  क्या  हूँ  मैं .
मुझको  खुद  ये  नहीं  है  पता .
हूँ  अकेला  इस  दुनिया  के  भीड़  में,
एक  साथी  हूँ ढूंढता,
चाँद  तारों  की  तमन्ना  नहीं 
न  महलो  में  मैं  रहना  चाहता 
न  पता  है  कोई  न  ठिकाना  मेरा,
बस  दिलों  में  ही  मैं  रहना  चाहता,
दिलों में  ही  रहना  चाहता.
कैसे  कहूँ  क्या  हूँ मैं.
मुझको  खुद  ये  नहीं  है  पता 

जिंदगी  एक  सफ़र  है 
और  मुसाफिर  हूँ  मैं  मंजिल  बड़ी  दूर  है 
और  मुश्किल  है  रास्ता.
तनहा  ये  राह  काटता  नहीं 
हमसफ़र  हूँ  मई  चाहता,
कैसे  कहूँ  क्या  हूँ  मैं.
मुझको  खुद  ये  नहीं  है  पता

मेरा गाँव

याद आता है मेरा बचपन 
याद आते है वो जीवन 
हरयाली ही हरयाली थी चारो तरफ 
उन खेतों में ही बसा है अब तक मेरा मन 
जब खेतों में हल चल करते थे 
हम पीछे पीछे दौड़ा करते थे 
माँ-बाबा बिज थे बोते 
हम मिटटी के घरौंदे बनाया करते थे
जब से हम परदेश में आये
सपना बन गया वो मंजर 
याद आता है मेरा बचपन
याद आते है वो जीवन


जब कभी बागों में जाना 
दुसरोके बाघ से आम चुराना
खुद के बाग़  से कुछ न लाना 
कभी बच के निकल जाते तो 
कभी पकडे जाने पर 
रोने का झूठा बहाना करना
ये सब लगता है आब एक सपना 
कितना प्यारा था वो गाँव अपना 
ईद, दिवाली, होली पावन
मिल कर मानते थे सब हम
याद जब आती है उन लम्हों की 
आँखे हो जाती है नम
याद आता है मेरा बचपन 
याद आता है वो जीवन
 

Thursday, January 12, 2012

माँ मुझको क्षमा कर देना

माँ मुझको क्षमा कर देना
वक़्त तुझे नहीं दे पता हूँ
चला मैं करने सेवा लोगों की
पर तेरे लिए नहीं कुछ कर पता हूँ
खुश रहने का तू देती मुझे आशीष सदा
पर खुशिया तुझे नहीं दे पता हूँ


माँ मुझको क्षमा कर देना
वक़्त तुझे नहीं दे पता हूँ
जब मैं था छोटा सा
पास रह कर तुझे सताता था
पाल -पोस कर मुझे बड़ा किया
फिर भी साथ तेरे नहीं रह पता हूँ

माँ मुझको तू क्षमा कर देना
वक़्त तुझे नहीं दे पता हूँ

रहता हूँ मैं ऊँचे माकानों में
तेरे ममता भरी आँचल के
छांव में नहीं रहा पता हूँ
याद बहुत सताती है जब......
चुपके से आंसू बहता हूँ


माँ मुझको क्षमा कर देना
वक़्त तुझे नहीं दे पता हूँ
चला मैं करने सेवा लोगों की
पर तेरे लिए नहीं कुछ कर पता हूँ
खुश रहने का तू देती मुझे आशीष सदा
पर खुशिया तुझे नहीं दे पता हूँ

Tuesday, January 10, 2012

माँ

तेरा ही मै गुणगान करूँ
हर पल माँ तुझे प्रणाम करूँ
मिला तुझसे है ये जीवन
तू  ही जन्मदाता  मेरी,
तू  ही मेरी भाग्यविधाता
मेरी हर सांसों पर
तेरा ही बस तेरा अधिकार है मेरी माँ
ये तन मन और ये जीवन
मिला है तुझसे
तेरे चरणों  में  है अर्पण
तेरे ही आज्ञां से चलती है
मेरे दिल की हर धड़कन 
आँख मूंद के, बिना कुछ पूछे
हर आज्ञां तेरी स्वीकार है माँ
होगा वो अपराध अगर
तुझसे कोई सवाल करूँ
हर पल तुझे प्रणाम करूँ
तेरा ही गुणगान करूँ
क्यों जाऊ मै
मंदिर और शिवालय
क्यों मै कोई दिखावा करूँ
पूजा होगी वो सबसे बड़ी
दो पल भी जो इन चरणों की सेवा करूँ.........
हर पल तुझे प्रणाम करूँ
बस तुझको ही मै ध्यान करूँ