सच है सच बहुत कड़वा होता है
लेकिन जीवन का संजीवनी रस होता है
कब तक टिकेगी वो इमारत.......
झूठ पर टिकी हो जिसकी बुनियाद
सच तो ये है कि एक दिन उसे गिर जाना है
मिट्टी में ही मिल जाना है
सच पर टिकी हो जिसकी बुनियाद
रहेगा वो जब तक है दुनिया आबाद
सच की भले हो राह कठिन
इस राह में नही कुछ भी नामुमकिन
सच है ये धरती और गगन
अग्नि, जल और पवन
हर चीज बना है बस इसी पंचतत्त्व से
और होना है अंत मे इसी में मिलन....
सच की राह पर जो चलता जाए
बिना डरे, बिना घबराए
जो चाहे वो पता जाए ।

