Friday, November 16, 2012

जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !


जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान!
परम पिता तुम परमेश्वर मेरे
हम तेरे बालक नादान
हाँथ जोड़ कर हम करे वंदना
ना देना हमे बल और शोहरत
ना देना धन-धान्य
सत्य उअर धरम की राह चले हम
ध्येय हो जनकल्याण
प्रभु देना हमे ये वरदान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!

श्याम वर्ण, तुम श्वेताम्बर धारी
हाँथ तुम्हारे ना खडग, ना कमंडल
ना तीर तलवार
धर्मराज के तुम हो सहायक
कलम - दावत है पहचान
सुर - असुर, नर - मुनि, जिव - प्राणी
धर्म - कर्म का लेखा रखते सबका एक सामान
एक परम पिता हो तुम सबके
भानु, विभानु, विश्व्भानु, विर्यभानु
चारु, सुचारू, चित्राख्य, और मतिमान
हिमवान, चित्रचारु, अरुणा, जितन्द्री सब तेरे संतान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!

ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः नमः नमः

Sunday, November 11, 2012

दिवाली वो बचपन वाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सजता था सवारता था घर का कोना - कोना
और माँ बनती थी रंगोली सात रंगों वाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
जगमग - जगमग  दीपों से
माँ सजाती थी थाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
दिए से दिए जलते थे
और बन जाती थी दीपावली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
गली-चौबारे या हो घर का आँगन
हर जगह होते थे रौशन दिए वो मिटटी वाले

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सुबह से होता था इन्तेजार शाम का
कब नए कपडे पहन हम खेलेंगे लुक्यारी

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
तरह - तरह के पकवान थे बनते
हमारे नजरो में होता था
बम,पटाखे,फुलझड़ी
और मिठाईयों से सजी प्रसाद की थाली

अब सब एक सपना सा लगता है
आज कहाँ है दिवाली वो बचपन वाली
और कहाँ घरौंधे वो मिटटी वाले ??



Monday, November 5, 2012

बदलती जिंदगी

जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे
और बदल रहा कारवां ।

बदल रही है दोस्ती, बदल रहा है प्यार भी 
और बदल रहा है ये जहाँ ।

अपने ही लगे है अब पीठ में खंजर घोपने,
हर कोई लगा है अब पेड़ साजिशों के रोपने,
इस जिंदगी का अर्थ क्या ? और है अंजाम क्या ?

यादें भी बदल रहे है, वादे भी बदल रहे है
और बदल रहा है दास्ताँ ।

ये जिंदगी अब खेल और इंसान खिलौना बन कर रहा गया ।
जिसे जी में आता खेलता है, फिर तोड़ खिलौना चल दिया ।।
बदल रहा सोच भी, बदल रहे लोग भी 
और बदल रही ये दुनिया ।

जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे 
और बदल रहा कारवां ।।