जन्म लिया इस गौरवमयी धरती पर,
इसके हम आभारी है,
न कोई शर्म, न लज्जा कहने में,
कि हम बिहारी है,
रहूँ चाहे दुनिया के किसी कोने में,
नहीं भूलूँगा कि हम संतान तुम्हारी है......
गोद में तेरे बचपन बिता,
आँचल तले आई जवानी है,
देख के तेरी ऐसी हालत,
आँखों भर आई पानी है,
जन्म दिया और पला-पोसा,
माँ का हर फर्ज़ तुने निभाई है,
अब बारी हमारी है,
न कोई शर्म, न लज्जा कहने में,
कि हम बिहारी है,
मान हमारी, सम्मान हमारी,
माँ तू तो है अभिमान हमारी,
तेरे चरणों में अर्पण है,
ये जीवन और जान हमारी,
न कोई शर्म, न लज्जा कहने में,
कि हम बिहारी है,
धुल तेरे चरणों की,
अपने मस्तक पर हम सजायेंगे,
खो रही जो तेरी गरिमा,
वापस उसे हम लायेंगे,
है कसम हमे इस मिट्टी की,
एक ने बिहार हमे बनानी है.
न कोई शर्म, न लज्जा कहने में,
कि हम बिहारी है,