तुझे इल्जाम दूँ कैसे मेरी जिंदगी
जरूर कमी मुझ में ही रही होगी ।।
यूँ बेवजह तो ठोकर लगा करती नहीं
जरूर आँखें मेरी ही बंद रही होंगी ।।
तू मुझसे जुदा हो गयी
या कोई और तेरे करीब आ गया,
इसमें खता तेरी नहीं
जरूर मैं ही तुझे अपना बना न सका ।।
हँसती - खिलखिलाती रहे तू खुदा करे
क्या हुआ जो हम मुस्कुरा न सके ।।
