Friday, October 12, 2012

जाने क्या होगा इस देश का...??

जहाँ मंहगा डीजल, महंगी गैस
नेताओं की हो रही पूरी ऐश
जाने क्या होगा इस देश का ??

कहीं कई दिनों से नहीं जले है चूल्हे
नित सामने आते नए घोटाले
जाने क्या होगा इस देश का ??


खुले है नाले, सड़कों का है खस्ता हाल
फिर भी हो रहा भारत निर्माण
जाने क्या होगा इस देश का ??

सुबह खाए तो पड़े भूखा रात को सोना 
गोदामों में सड़ रहा अनाज
जाने क्या होगा इस देश का ??

कहीं पर सुखा कहीं अकाल
नेता हो रहे माला माल
जाने क्या होगा इस देश का ??

जनता मांगे रोजी रोजगार
मोबाईल बांटने चली सरकार
जाने क्या होगा इस देश का ??

कार्टून बनाना हुआ अपराध
बलात्कार हुआ साधारण सी बात
जाने क्या होगा इस देश का ??

चारो तरफ मचा है हाहाकार
लोकतंत्र पर से उठ गया विश्वास
जाने क्या होगा इस देश का ??

Tuesday, October 9, 2012

कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए

भरी महफ़िल में बदनाम हो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए

ओ बेवफा तुने ये क्या किया
मेरी चाहतों का ये कैसा सिला दिया
तेरे प्यार में हम, क्या से क्या हो गए
कभी मशहूर थे आज गुमनाम हो गए

चाह था तुझे मैंने जान से भी ज्यादा
तेरे संग जिंदगी बिताने का था इरादा
ना मंजिल ही पाई मैंने, ना तुझे ही पा सके
इन राहों पे चलते-चलते, हम मंजिल से दूर हो गए
अरमां जो थे दिल के, सब चूर हो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए

तुमने जो मुझे तनहा छोड़ दिया
खुशियों ने भी मेरी, मुझसे मुह मोड़ लिया
तन्हा यूँ जीने का मुझको नहीं कोई अरमान है
मेरे जीवन में अब बची नहीं मुस्कान है
मुस्कान मेरे जाने कहाँ खो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए

भरी महफ़िल में बदनाम हो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए
कभी मशहूर थे, आज गुमनाम हो गए 

बहुत बढ़ गयी है मंगाई, लेकिन नहीं बढ़ी कमाई


आज सबेरे जब दफ्तर मैं पहुंचा
बॉस मेरा मुझसे पहले था आ बैठा
हाँथ जोड़ कर मैंने किया नमस्ते
हुयी देर क्यों बदले में उन्होंने पूछा
तब मैंने अपनी व्यथा सुनाई
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
समय से निकला था मैं घर से
लेकिन बहुत देर एक ऑटो आई
बैठा जल्दी - जल्दी में मैं
कही बैठ ना जाये दूसरा कोई भाई
ऑटो चला वहाँ से
लेकिन उनसे थोड़ी देर लगायी
मेरे अलावा ऑटो के अन्दर बैठी थी एक बूढी माई
कुछ चलने के बाद उन्होंने ऑटो रुकवाई
निकाला बटुआ और दिए कुछ पैसे
ऑटो वाले ने कहा ये क्या दे रही हो
और पैसे दो माई
माई बोली और क्यों दूँ
इतनी ही अब तक मैं देती आई
ड्राइवर बोला बात सही है तेरी माई
लेकिन देखो कितनी बढ़ गयी है मंहगाई
डीजल महंगा, गैस भी महंगा
राशन वाले ने भी दाम बढ़ाई
बिजली महंगी, पानी मंहगा
शब्जी वाले ने भी रेट बढ़ाई
बस कर, बस कर ये ले पैसे
बूढी माई ने फिर मुह बनायीं
दिया पैसे फिर गिन - गिन कर
लेकिन उन्होंने बहुत देर लगायी
उनकी भी नहीं है गलती कोई
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
बॉस मेरा खामोश रहा
कुछ कहते ना उनसे बना
कहते भी मुझसे क्या
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई

Monday, October 8, 2012

माँ है तेरा आशीष बहुत



क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती  ??

माँ है तेरा आशीष बहुत 
जो हर संकट से मुझे बचाती है 

माँ तू मेरे लिए 
क्यों व्रत नए तू रखती है ??

देख के तुझको पीड़ा में 
दिल मेरा माँ रोता है 

धिक्कारता है मुझको मेरा मन 
कैसे चैन से तू सोता है ?

क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती ??

पा लेता हू जन्नत का सुख 
जब सर मेरा तू सहलाती है  

दूर हो जाती हर बाधा परेशानी 
जब गले तू मुझको लगाती है 

फिर माँ तू मेरे लिए 
क्यों व्रत नए तू रखती है ??

क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती है ??

Sunday, October 7, 2012

दोराहे पर खड़ा हूँ मैं


दोराहे पर खड़ा हूँ मैं
समझ में ना आये किधर को जाऊ
इधर को जाऊ या उधर को जाऊ
आखिर मैं किधर को जाऊ

ना कोई साथी ना हमसफ़र है
किसको मैं हमराह बनाऊ
मंजिल मेरी दूर बहुत है
और बढ़ी मुश्किल इसकी डगर है

सफ़र अकेला कटेगा कैसे
कैसे मिलेगी मंजिल मुझको

साथी मिले थे राहों में जो
किसी मोड़ पर छुट गए है
भटक गया हूँ राह मैं या
वो मुझसे रूठ गए है

एक राह में जज्बातों की
एक रहा है अरमानो की
इस दुविधा घिरा हुआ हूँ
आखिर किस राह को अपनाऊ

दोराहे पर खड़ा हूँ मैं
समझ में ना आये किधर को जाऊ
इधर को जाऊ या उधर को जाऊ
आखिर मैं किधर को जाऊ