Thursday, December 29, 2011

बीत गया धीरे - धीरे ये साल पुराना


बीत गया धीरे - धीरे ये साल पुराना 
भूल के सरे शिकवे - गिले छेड़ो प्यार का कोई नया तराना

भुलाना मगर सिर्फ शिकवे - गिले को,
भूल से भी हमको न भुला देना
भूल से  भी हमको न भुला देना 

दुख के जो काले बदल थे उनको है छट जाना
नयी उम्मीद, नए चाहतें, नयी मंजिले और नए रास्ते

जो बीत गया उससे क्या लेना
जो खोया था कल उसे आज फिर से है पाना
 दिन का क्या इनको तो है आना जाना 

एक दिन तो हो जायेगा ये साल भी पुराना 
करो कुछ ऐसा इस नए साल में मुश्किल हो उसको भुलाना 

बीत गया धीरे धीरे ये साल पुराना 
भूल के सारे शिकवे - गिले, छेड़ो प्यार का कोई नया तराना 

छुट गया जो मंजिल पीछे छोडो उनको 
बढ़ो तुम आगे बढ़ो 
देखो पड़ा है खुशियों का कितना बड़ा खजाना 

बीत गया धीरे धीरे ये साल पुराना 
भूल के सारे शिकवे - गिले, छेड़ो प्यार का कोई नया तराना 
                                                                                                                      

Wednesday, December 21, 2011

जिंदगी एक पहेली है

जिंदगी एक पहेली है,
कभी दुश्मन तो , कभी सहेली है,

कभी है दुखों की भरमार,
तो कभी है खुशियाँ अपार,
जिंदगी तो है एक इम्तेहान यारों,
कोई पास हुआ, तो कोई फेल यारों,
जिंदगी तो है एक खेल यारों,
कभी हार तो कभी है जीत यारों,
इसकी अजब - गजब है रीत यारों,
जिंदिगी के जैसा नहीं कोई मीत यारों,
कभी अपनों को दूर कर देती है,
कभी सपनो को चूर कर देती है,
हर किसी को मजबूर कर देती है,
जिंदगी कभी मिलन है, तो कभी है जुदाई,
कभी मेला, कभी तन्हाई है,
कभी अपनी है, तो कभी है पराई,
जिंदगी तो बेवफा है, इसका न तुम ऐतबार करना,
इस जिंदगी से कभी न तुम प्यार करना,
कभी सावन है, तो कभी पतझड़ का मौसम,
कभी रास्ता है, तो कभी हमदम,
हर क्षण, हर पल लेती रूप बदल जिंदगी,
कभी है गहरा जख्म जिंदगी,
कभी बन जाये खुद मरहम जिंदगी,
कभी है ये कष्टों के कांटे,
तो कभी बन जाये माँ का आँचल,
कोई नहीं जान सका इसको,
कोई नहीं पहचान सका इसको,
कि क्या है जिंदगी....?


जिंदगी एक पहेली है,
कभी दुश्मन तो , कभी सहेली है,

Sunday, December 18, 2011

नींद किसे आती है और चैन कहाँ मिलता है


नींद किसे आती है और चैन कहाँ मिलता है
जब प्यार किसी से होता है
आता नहीं फिर कुछ और नजर
हर पल निगाहों में चेहरा सनम का होता है
नींद किसे आती है और चैन कहाँ मिलता है
जब प्यार किसी से होता है
क्या करूँ मैं अगर दिल मेरा बेचैन है
हटता नहीं एक पल को तेरे रस्ते से ये नैन है
नींद किसे आती है और चैन कहाँ मिलता है
जब प्यार किसी से होता है
खोया रहता है दिल यार की बातों में
करवटें बदलता रहता हू तन्हा रातों में
तुने मुझ पर ये कैसा जादू किया
खो गया है ना जाने कहाँ मेरा जिया
आता नहीं नजर कुछ भी तेरे शिवा
ओ मेरे सनम, कर मुझ पे इतना करम
लौटा दे मेरा सुख-चैन
नींद किसे आती है और चैन कहाँ मिलता है
जब प्यार किसी से होता है
हर पल निगाहों में चेहरा सनम का होता है

Thursday, December 15, 2011

रिझिम-रिमझिम सावन


गीली गीली मिटटी की
सोंधी-सोंधी खुशबू हो
रिझिम-रिमझिम सावन की
प्यारी-प्यारी बुँदे हो
दूर तलकतो तन्हाई
और साथ मेरे बस तुम हो
होश ना हो हमें दुनियां की
बस एक दूजे में हम गम हों

गीली-गीली मिट्टी की
सोंधी-सोंधी खुशबू हो
रिमझि-रिमझिम सावन की
प्यारी-प्यारी बुँदे हो

आज फिर ये सावन है आया
बूंदों के बाण चलाया है
रिमझिम-रिमझिम बर्ष के साथ
तेरी यादों का झोका लाया है
आज भी है वो सुनी सड़कें
बस साथ नहीं है तेरा साया
भींग रहा है तन मेरा
और दिलने आवाज लगाया है

गीली-गीली मिट्टी की
सोंधी-सोंधी खुशबू हो
रिमझिम-रिमझिम सावन की
प्यारी-प्यारी बूँदें हो
दूर तलक हो तन्हाई
और हांथों में हाँथ तेरा हो

थोड़ी पगली, थोड़ी दीवानी सी


कैसे मैं बतादूं कौन है वो.....??
जादू जिसने चलाया है
नीली-नीली आँखों से
दिल को मेरे चुराया है
अदाओं की उसकी क्या बात करू
रहना हर पल उसके साथ चाहूँ
है वो लड़की एक अंजनी सी
थोड़ी पगली, थोड़ी दीवानी सी
जुल्फ है की जैसे काले बदल
अम्बर के जैसा उसका आँचल
हिरनी के जैसे उसकी मतवाली चल
आँखे जय हो दो चमकते सितारे
गल उसके जैसे हो कोई कोमल गुलाब
बदन हो के जसे संगमरमर की मूरत
बड़ी प्यारी है उसकी सूरत
सच कहता हू नहीं कोई उसका जवाब
पलके जब वो झुकाती है
दिन ये तब ढल जाता है
सुबह की पहली किरने करती है इंतजार
लेगी अंगडाई वो
मचल जाता हू यारों मैं
नजर आ जाती है जब वो
है एक लड़की अंजनी सी
थोड़ी पगली, थोड़ी दीवानी सी

एक अजनबी

ऐ अजनबी तू कौन है......??
क्यों तेरे लिए दिल बेचैन है.....???
यहाँ – वहाँ चाहे मैं देखूँ जहाँ
हर जगह मुझको तू आये नजर
तेरे हुश्न का छाया इस कदर है
दुनिया की मैं क्या कहूँ, मुझको ना खुद की खबर है
तेरा अहसास मुझ्कोप देता सुकून है
तेरे प्यार प्यार का मुझपर छाया जूनून है
चाहत तेरी नशा बन गयी है
दर्द ही मेरी अब दावा बन गयी है
तुझसे है मेरा कोई पुराना रिश्ता
क्या है वो, ये तू ही दे बता
जब भी तू नजर आ जाये कहीं
थमने लगती है मेरी सांसे वहीँ
तुझसे मिलना और बातें करना चाहता हूँ
अपना तुझे बनाना चाहता हूँ
तू कौन है क्या नाम तेरा
मुझसे नहीं अब जाता रहा
दे दे मुझे तू अपना पता
ऐ अजनबी तू कौन है......??
क्यों तेरे लिए दिल बेचैन है.....???

माँ मुझको अपने पास बुला ले

थक जाता हूँ दिन भर काम करते-करते
सो लेते कुछ गोद में तेरे, पास जो तू मेरे होती
भूख भी अब लगती नहीं, खुद हाँथ जलाते-जलाते 
कहते अपने हांथों से तू दो निवाले खिला दे
पास जो तू मेरे होती
रो पड़ता हू हसने की कोशिश करते-करते
मुस्कुरा लेते शरारत करके, पास जो तू मेरे होती
खो ना जाऊं दुनिया की भीड़ में, यूँ अकेले चलते-चलते
थाम के हाँथ तेरा कहते माँ मुझको राह दिखा दे
हूँ बहुत दूर तुझसे, कोई नहीं अपना यहाँ सब है बेगाने
लगता नहीं एक पल दिल यहाँ, माँ मुझको अपने पास बुला ले
पास बुला ले अपने सीने से लगा ले
सीने से लगा मुझे आँचल में छुपा ले 
माँ मुझको अपने पास बुला ले...........

Sunday, October 30, 2011

पगली सी लड़की

आज सबेरे जब खिड़की से देखा 
मौसम बड़ा सुहाना था
ऐसे मौसम को देख कर 
जरुरी याद किसीका आना था 
एक अल्हड सी, पगली सी लड़की 
नटखट सी, शर्मीली सी लड़की
मेरे पड़ोस में रहती थी
उम्र थी उसकी 19  की 
पर हरकत बच्चों सी वो करती थी
शाम सबेरे चुपके - चुपके 
दूर से देखा करती थी
रोज सबेरे किसी ना किसी बहाने 
घर भी आया करती थी
कहना था शायद उसको
जाने क्यों ना कह पाती थी
एक अल्हड सी, पगली सी लड़की 
नटखट सी, शर्मीली सी लड़की
मेरे पड़ोस में रहती थी
 ताकता रहता था मै भी उसको 
उसकी हर अदा का मै दीवाना था
घंटों बैठ सड़क किनारे
इंतजार मै उसका करता था
जिस सड़क से उसका आना जाना था
तकते रहना दूर से एक - दूजे को
बस यही काम हमारा रोजाना था
मै तो था एक परदेशी 
वापस मुझको तो आ जाना था
दूर हुए हम एक - दूजे से 
फिर नहीं हमे मिल पाना था
आज सबेरे खिड़की से देखा
मौसम बड़ा सुहाना था 
देख कर ऐसे मौसम को
उस अल्हड सी, प्यारी सी लड़की की
भोली सी सीधी साधी सी लड़की की 
याद मुझे तो आना था 
आज सबेरे जब खिड़की से देखा
मौसम बड़ा सुहाना

Thursday, October 20, 2011

कमबख्त दिल

कमबख्त दिल न जाने क्या कर बैठता है
है जिसे पाना मुश्किल उसी पर मर मिटता है
हस्ती भुला कर ये अपनी, 
किसीको दुनिया बना लेता है 
सपनों में अपने उसी को सजा लेता है
यादो को उसकी पलकों में बसा लेता है
आँखों को उसकी आइना बना लेता है
कम्बखत दिल न जाने क्या कर बैठता है
हाँथ बढाकर चाँद को तोडना चाहता है
जो हो नामुमकिन,
या वही करना चाहता है
ख्वाब देखता है ये ऐसा 
जो कभी पूरा ही ना हो
कमबख्त दिल ना जाने क्या कर बैठता है.........

Saturday, October 15, 2011

I want sing, I want dance

I want sing, I want dance
I Want love, I want romance
दिल ने मेरे आज फैसला है किया
प्यार तुझसे ही करना है
तेरे संग जीना - मरना है
तेरे लिए कुछ भी मैं कर जाऊंगा
तू ना मिली तो मैं मर जाऊंगा
करले - करले तू मेरा विश्वास 
I want sing, I want dance
I want love, I want Romance
Come, come, come baby come with me
I am your and your will be
Give me, Give me, Give me a chance 
I want sing, I want dance
I want love, I want romance
पलकों में तुझको मैं छुपा लूँगा
सांसो में अपने मैं बसा लूँगा
धड़कन तुझे मैं अपनी बना लूँगा
जां से भी ज्यादा तुझे मैं चाहूँगा
दूर तुझसे न कभी मैं जाऊंगा
करता हूँ वडा मैं तुझसे सनम
मिलके जुदा न कभी होंगे हम 
चाहे आजाये कोई तूफान 
I want sing, I want dance
I want love, I want Romance
I will be always with you ओ मेरी जां 
Give me, give me, give me a chance
I want sing, I want dance
I want love, I want romance 


Friday, October 14, 2011

काश के हम बच्चें होते

काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
जल्दी सोते, जल्दी जागते
नहा - धोकर, सुबह - सबेरे 
यारों के संग स्कूल को जाते
काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
ना चिंता, ना परवाह दुनियां की 
बस मस्ती ही मस्ती होती
स्कूल को जाना, स्कूल से आना 
चोरी से औरन की टिफिन का खाना
पकडे जाने पर बहाने बनाते
काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
किताबों में अपनी दुनिया होती
हिसाबों में ही हम खोये रहते
वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी 
जब नानी सुनती थी परियों की कहानी
झूठ नहीं सब सच्चे लगते 
काश के हम बच्चें होते

Saturday, October 1, 2011

मेरी दुनिया जन्नत मेरी


सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको ही याद
करुणामयी है और ममतामयी है
स्नेह तेरी आँचल भरी है
पीड़ा सह कर जन्म दिया
करती मेरे लिए तू नित नए उपवास
पानी पहले मुझको पिलाये
लगता जब कभी तुझको है प्यास
छींक भी अगर आजाये मुझको
जागे तू सारी - सारी रात
दुख भी उठाती, सहती है कस्ट हजार
लेकिन फिर भी कभी होने ना दिया
मुझे जरा भी अहसास
हूँ परदेश दूर बहुत तुझसे
साया तेरा फिर भी हर पल है पास
सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको याद
मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर
ना जाऊं मैं तीर्थ कैलाश
मेरी दुनिया जन्नत मेरी
सब है माँ तेरे कदमो के पास

नन्हा फ़रिश्ता

एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
रिश्ते नए कई लायेगा 
बीवी, बहन, बेटी थी जो अब तक
अब वो कहलाएगी माँ 
कोई बनेंगे दादा-दादी 
नाना-नानी बनेंगे मरे पापा और माँ
तो कोई चाचा कहलायेगा
जीजू बनेगे पापा तो 
मामा मुझे कोई बुलाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
खुशियाँ ही खुशियाँ लायेगा
फूलों सा कोमल, कलियों से नाजुक
होंगे उसके बदन 
गुलाब की कोमल पंखुरियों से
होंगे उकसे होंठ
चाँद सा रौशन चेहरा होगा
आँखों में होगी तारों सी चमक
महक उठेगा घर आँगन 
जब नन्हें कदमो से दौड़ लगाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
मेरा बचपन वापस लायेगा
कितनी मधुर होगी हो आवाज 
जब वो तुतलायेगा
होगा वो पल कितना अनमोल 
पहली बार वो जब 
मामा मुझे बुलाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
रिश्ते नए कई लायेगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा........!!!

मेरी तमन्ना

एक तमन्ना है मेरी बस......
चरणों में तेरे बीते ये जीवन
छाया बनके आँचल तेरा, 
मेरे सर पर रहे सारी उम्र 
मिला तुझसे है जीवन
तेरे चरणों में ही हो ख़त्म 
धुल तेरे कदमों की 
चमके सदा मेरे माथे पर
तेरे ममता के साये से 
जाने ना पाऊं दूर उम्र भर
मेरी बस यही है चाहत है
साया तेरा सदा रहे मेरे सर पर
जब भी कभी डगमगाए मेरे कदम
मुझको थम ले तेरा दामन
ऐ मेरे जीवन के दाता
जननी मेरी मेरी माता
दे दे मुझको बस वर इतना सा
साथ रहे तेरा आशीष सदा
यही तमन्ना है मेरी बस......