थक जाता हूँ दिन भर काम करते-करते
सो लेते कुछ गोद में तेरे, पास जो तू मेरे होती
भूख भी अब लगती नहीं, खुद हाँथ जलाते-जलाते
कहते अपने हांथों से तू दो निवाले खिला दे
पास जो तू मेरे होती
रो पड़ता हू हसने की कोशिश करते-करते
मुस्कुरा लेते शरारत करके, पास जो तू मेरे होती
खो ना जाऊं दुनिया की भीड़ में, यूँ अकेले चलते-चलते
थाम के हाँथ तेरा कहते माँ मुझको राह दिखा दे
हूँ बहुत दूर तुझसे, कोई नहीं अपना यहाँ सब है बेगाने
लगता नहीं एक पल दिल यहाँ, माँ मुझको अपने पास बुला ले
पास बुला ले अपने सीने से लगा ले
सीने से लगा मुझे आँचल में छुपा ले
माँ मुझको अपने पास बुला ले...........
सो लेते कुछ गोद में तेरे, पास जो तू मेरे होती
भूख भी अब लगती नहीं, खुद हाँथ जलाते-जलाते
कहते अपने हांथों से तू दो निवाले खिला दे
पास जो तू मेरे होती
रो पड़ता हू हसने की कोशिश करते-करते
मुस्कुरा लेते शरारत करके, पास जो तू मेरे होती
खो ना जाऊं दुनिया की भीड़ में, यूँ अकेले चलते-चलते
थाम के हाँथ तेरा कहते माँ मुझको राह दिखा दे
हूँ बहुत दूर तुझसे, कोई नहीं अपना यहाँ सब है बेगाने
लगता नहीं एक पल दिल यहाँ, माँ मुझको अपने पास बुला ले
पास बुला ले अपने सीने से लगा ले
सीने से लगा मुझे आँचल में छुपा ले
माँ मुझको अपने पास बुला ले...........
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