जिंदगी एक पहेली है,
कभी दुश्मन तो , कभी सहेली है,
कभी है दुखों की भरमार,
तो कभी है खुशियाँ अपार,
जिंदगी तो है एक इम्तेहान यारों,
कोई पास हुआ, तो कोई फेल यारों,
जिंदगी तो है एक खेल यारों,
कभी हार तो कभी है जीत यारों,
इसकी अजब - गजब है रीत यारों,
जिंदिगी के जैसा नहीं कोई मीत यारों,
कभी अपनों को दूर कर देती है,
कभी सपनो को चूर कर देती है,
हर किसी को मजबूर कर देती है,
जिंदगी कभी मिलन है, तो कभी है जुदाई,
कभी मेला, कभी तन्हाई है,
कभी अपनी है, तो कभी है पराई,
जिंदगी तो बेवफा है, इसका न तुम ऐतबार करना,
इस जिंदगी से कभी न तुम प्यार करना,
कभी सावन है, तो कभी पतझड़ का मौसम,
कभी रास्ता है, तो कभी हमदम,
हर क्षण, हर पल लेती रूप बदल जिंदगी,
कभी है गहरा जख्म जिंदगी,
कभी बन जाये खुद मरहम जिंदगी,
कभी है ये कष्टों के कांटे,
तो कभी बन जाये माँ का आँचल,
कोई नहीं जान सका इसको,
कोई नहीं पहचान सका इसको,
कि क्या है जिंदगी....?
जिंदगी एक पहेली है,
कभी दुश्मन तो , कभी सहेली है,
कभी दुश्मन तो , कभी सहेली है,
कभी है दुखों की भरमार,
तो कभी है खुशियाँ अपार,
जिंदगी तो है एक इम्तेहान यारों,
कोई पास हुआ, तो कोई फेल यारों,
जिंदगी तो है एक खेल यारों,
कभी हार तो कभी है जीत यारों,
इसकी अजब - गजब है रीत यारों,
जिंदिगी के जैसा नहीं कोई मीत यारों,
कभी अपनों को दूर कर देती है,
कभी सपनो को चूर कर देती है,
हर किसी को मजबूर कर देती है,
जिंदगी कभी मिलन है, तो कभी है जुदाई,
कभी मेला, कभी तन्हाई है,
कभी अपनी है, तो कभी है पराई,
जिंदगी तो बेवफा है, इसका न तुम ऐतबार करना,
इस जिंदगी से कभी न तुम प्यार करना,
कभी सावन है, तो कभी पतझड़ का मौसम,
कभी रास्ता है, तो कभी हमदम,
हर क्षण, हर पल लेती रूप बदल जिंदगी,
कभी है गहरा जख्म जिंदगी,
कभी बन जाये खुद मरहम जिंदगी,
कभी है ये कष्टों के कांटे,
तो कभी बन जाये माँ का आँचल,
कोई नहीं जान सका इसको,
कोई नहीं पहचान सका इसको,
कि क्या है जिंदगी....?
जिंदगी एक पहेली है,
कभी दुश्मन तो , कभी सहेली है,
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