Thursday, December 29, 2011

बीत गया धीरे - धीरे ये साल पुराना


बीत गया धीरे - धीरे ये साल पुराना 
भूल के सरे शिकवे - गिले छेड़ो प्यार का कोई नया तराना

भुलाना मगर सिर्फ शिकवे - गिले को,
भूल से भी हमको न भुला देना
भूल से  भी हमको न भुला देना 

दुख के जो काले बदल थे उनको है छट जाना
नयी उम्मीद, नए चाहतें, नयी मंजिले और नए रास्ते

जो बीत गया उससे क्या लेना
जो खोया था कल उसे आज फिर से है पाना
 दिन का क्या इनको तो है आना जाना 

एक दिन तो हो जायेगा ये साल भी पुराना 
करो कुछ ऐसा इस नए साल में मुश्किल हो उसको भुलाना 

बीत गया धीरे धीरे ये साल पुराना 
भूल के सारे शिकवे - गिले, छेड़ो प्यार का कोई नया तराना 

छुट गया जो मंजिल पीछे छोडो उनको 
बढ़ो तुम आगे बढ़ो 
देखो पड़ा है खुशियों का कितना बड़ा खजाना 

बीत गया धीरे धीरे ये साल पुराना 
भूल के सारे शिकवे - गिले, छेड़ो प्यार का कोई नया तराना 
                                                                                                                      

No comments:

Post a Comment