"My Deam" Is blog ke madhyam se mai apne dil ki baton ko, ahsaon ko shabdon ka roop dene ki koshish karta hu. isse mujhe lagta hai ki maine apni baat apne apno ya aapne dosto se kaah diya.. ye sach bhi hai kyuki jo log mere post ko padhte hai wo kaun hai??? mere apne hi to hai.... mere dost hi to hai.. :)
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Saturday, February 27, 2016
Friday, January 25, 2013
बेटी है तो कल है
माँ, बीवी और बहन है बेटी
घर - आँगन और जीवन जो महका देती
सुगन्धित फूलों का वो उपवन है बेटी
कली सी कोमल, फूलों सी नाजुक
प्रकृति का अनमोल सृजन है बेटी
नीरस से वीरान जीवन में
सुर की गंगा जो बहा देती
सात सुरों का सरगम है बेटी
जब छाता जीवन घनघोर अँधेरा
और नजर न आती रह कोई
तब उम्मीद की आखिरी किरण है बेटी
दुःख संताप की कठिन घडी में
मुस्काता दर्पण है बेटी
बिन बेटी संभव नहीं है
कर पाना इस सृष्टि की कल्पना
बीज अंकुरित होता जहाँ से जीवन का
वो धरा वो गगन है बेटी
बोझ नहीं ये पाप नहीं
जन्म जन्मों के शुभ कर्मों ये तो फल है
बेटी है तो कल है
बेटी है तो कल है
घर - आँगन और जीवन जो महका देती
सुगन्धित फूलों का वो उपवन है बेटी
कली सी कोमल, फूलों सी नाजुक
प्रकृति का अनमोल सृजन है बेटी
नीरस से वीरान जीवन में
सुर की गंगा जो बहा देती
सात सुरों का सरगम है बेटी
जब छाता जीवन घनघोर अँधेरा
और नजर न आती रह कोई
तब उम्मीद की आखिरी किरण है बेटी
दुःख संताप की कठिन घडी में
मुस्काता दर्पण है बेटी
बिन बेटी संभव नहीं है
कर पाना इस सृष्टि की कल्पना
बीज अंकुरित होता जहाँ से जीवन का
वो धरा वो गगन है बेटी
बोझ नहीं ये पाप नहीं
जन्म जन्मों के शुभ कर्मों ये तो फल है
बेटी है तो कल है
बेटी है तो कल है
Thursday, December 27, 2012
हम युवा ही असली शक्ति है
हम पानी में आग लगा सकते हैं,
हम पत्थर पे फूल खिला सकते हैं,
हम बदल सकते है तक़दीर तुम्हारी,
झुका सकते है क़दमों में दुनिया सारी,
हम युवा ही असली शक्ति है,
बाकी सब तो मिटटी है.
युवा ही था वो वीर भगत, सुखदेव और राजगुरु
श्रधा से हर शीस जिसके आगे झुकती है
याद करो उस खुदीराम,
अंग्रेजो ने फंसी पर जिसे चढ़ाया था,
उम्र थी केवल 19 की,
आजादी की अलख उसने जगाया था.
हमने जो एक बार ठान लिया तो
कुछ भी हम कर जाते है
चट्टानों के सीनों को भी,
चिर के राहे हम बनाते है,
हम पानी में आग लगा सकते हैं
हम पत्थर पे फूल खिला सकते हैं
हम युवा ही असली शक्ति है
बाकी सब तो मिटटी है.
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Sunday, December 2, 2012
घर का आँगन
आज कहाँ वो घर का आँगन
जो अंतहीन सा लगता था ???
कभी क्रिकेट तो कभी कबड्डी
का मैदान जो बनता था
हर घर की चारदीवारी में
एक नया जहान सा बसता था
दादा-दादी, मम्मी-पापा,
चाचा-चची, दीदी-बुआ
चहू दिशा से घर का हर दरवाजा
आ कर वही खुलता था
सर्दी की सुबह हो या
गर्मी की रातें
या फिर हो सावन की बरसातें
हर मौसम वही गुजरता था
गूंजता करता था देवर-भाभी की हास्य बम
तो सास-बहु, नन्द-भाभी में
शीत युद्ध भी होता था
आफत सी मच जाती थी घर में
जब बच्चा कोई रोता था
तब होता था एक बूढ़ा चापाकल
जो प्यास सभी की बुझाता था
जलता था एक ही मिटटी का चूल्हा
पर भूखा नहीं कोई सोता था
आँगन नहीं वो एक धुरी थी
जो हमको बांधे रखता था
धीरे-धीरे घटता गया
टुकड़ों में बांटता गया
आज कहाँ वो घर का आँगन
जो अंतहीन सा लगता था ????
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Friday, November 16, 2012
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान!
परम पिता तुम परमेश्वर मेरे
हम तेरे बालक नादान
हाँथ जोड़ कर हम करे वंदना
ना देना हमे बल और शोहरत
ना देना धन-धान्य
सत्य उअर धरम की राह चले हम
ध्येय हो जनकल्याण
प्रभु देना हमे ये वरदान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!
श्याम वर्ण, तुम श्वेताम्बर धारी
हाँथ तुम्हारे ना खडग, ना कमंडल
ना तीर तलवार
धर्मराज के तुम हो सहायक
कलम - दावत है पहचान
सुर - असुर, नर - मुनि, जिव - प्राणी
धर्म - कर्म का लेखा रखते सबका एक सामान
एक परम पिता हो तुम सबके
भानु, विभानु, विश्व्भानु, विर्यभानु
चारु, सुचारू, चित्राख्य, और मतिमान
हिमवान, चित्रचारु, अरुणा, जितन्द्री सब तेरे संतान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!
ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः नमः नमः
Sunday, November 11, 2012
दिवाली वो बचपन वाली
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सजता था सवारता था घर का कोना - कोना
और माँ बनती थी रंगोली सात रंगों वाली
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
जगमग - जगमग दीपों से
माँ सजाती थी थाली
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
दिए से दिए जलते थे
और बन जाती थी दीपावली
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
गली-चौबारे या हो घर का आँगन
हर जगह होते थे रौशन दिए वो मिटटी वाले
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सुबह से होता था इन्तेजार शाम का
कब नए कपडे पहन हम खेलेंगे लुक्यारी
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
तरह - तरह के पकवान थे बनते
हमारे नजरो में होता था
बम,पटाखे,फुलझड़ी
और मिठाईयों से सजी प्रसाद की थाली
अब सब एक सपना सा लगता है
आज कहाँ है दिवाली वो बचपन वाली
और कहाँ घरौंधे वो मिटटी वाले ??
सजता था सवारता था घर का कोना - कोना
और माँ बनती थी रंगोली सात रंगों वाली
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
जगमग - जगमग दीपों से
माँ सजाती थी थाली
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
दिए से दिए जलते थे
और बन जाती थी दीपावली
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
गली-चौबारे या हो घर का आँगन
हर जगह होते थे रौशन दिए वो मिटटी वाले
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सुबह से होता था इन्तेजार शाम का
कब नए कपडे पहन हम खेलेंगे लुक्यारी
याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
तरह - तरह के पकवान थे बनते
हमारे नजरो में होता था
बम,पटाखे,फुलझड़ी
और मिठाईयों से सजी प्रसाद की थाली
अब सब एक सपना सा लगता है
आज कहाँ है दिवाली वो बचपन वाली
और कहाँ घरौंधे वो मिटटी वाले ??
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Monday, November 5, 2012
बदलती जिंदगी
जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे
और बदल रहा कारवां ।
बदल रही है दोस्ती, बदल रहा है प्यार भी
और बदल रहा है ये जहाँ ।
अपने ही लगे है अब पीठ में खंजर घोपने,
हर कोई लगा है अब पेड़ साजिशों के रोपने,
इस जिंदगी का अर्थ क्या ? और है अंजाम क्या ?
यादें भी बदल रहे है, वादे भी बदल रहे है
और बदल रहा है दास्ताँ ।
ये जिंदगी अब खेल और इंसान खिलौना बन कर रहा गया ।
जिसे जी में आता खेलता है, फिर तोड़ खिलौना चल दिया ।।
बदल रहा सोच भी, बदल रहे लोग भी
और बदल रही ये दुनिया ।
जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे
और बदल रहा कारवां ।।
Tuesday, October 9, 2012
बहुत बढ़ गयी है मंगाई, लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
आज सबेरे जब दफ्तर मैं पहुंचा
बॉस मेरा मुझसे पहले था आ बैठा
हाँथ जोड़ कर मैंने किया नमस्ते
हुयी देर क्यों बदले में उन्होंने पूछा
तब मैंने अपनी व्यथा सुनाई
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
समय से निकला था मैं घर से
लेकिन बहुत देर एक ऑटो आई
बैठा जल्दी - जल्दी में मैं
कही बैठ ना जाये दूसरा कोई भाई
ऑटो चला वहाँ से
लेकिन उनसे थोड़ी देर लगायी
मेरे अलावा ऑटो के अन्दर बैठी थी एक बूढी माई
कुछ चलने के बाद उन्होंने ऑटो रुकवाई
निकाला बटुआ और दिए कुछ पैसे
ऑटो वाले ने कहा ये क्या दे रही हो
और पैसे दो माई
माई बोली और क्यों दूँ
इतनी ही अब तक मैं देती आई
ड्राइवर बोला बात सही है तेरी माई
लेकिन देखो कितनी बढ़ गयी है मंहगाई
डीजल महंगा, गैस भी महंगा
राशन वाले ने भी दाम बढ़ाई
बिजली महंगी, पानी मंहगा
शब्जी वाले ने भी रेट बढ़ाई
बस कर, बस कर ये ले पैसे
बूढी माई ने फिर मुह बनायीं
दिया पैसे फिर गिन - गिन कर
लेकिन उन्होंने बहुत देर लगायी
उनकी भी नहीं है गलती कोई
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
बॉस मेरा खामोश रहा
कुछ कहते ना उनसे बना
कहते भी मुझसे क्या
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
Monday, October 8, 2012
माँ है तेरा आशीष बहुत
क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती ??
माँ है तेरा आशीष बहुत
जो हर संकट से मुझे बचाती है
माँ तू मेरे लिए
क्यों व्रत नए तू रखती है ??
देख के तुझको पीड़ा में
दिल मेरा माँ रोता है
धिक्कारता है मुझको मेरा मन
कैसे चैन से तू सोता है ?
क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती ??
पा लेता हू जन्नत का सुख
जब सर मेरा तू सहलाती है
दूर हो जाती हर बाधा परेशानी
जब गले तू मुझको लगाती है
फिर माँ तू मेरे लिए
क्यों व्रत नए तू रखती है ??
क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती है ??
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माँ है तेरा आशीष बहुत
Sunday, October 7, 2012
दोराहे पर खड़ा हूँ मैं
दोराहे पर खड़ा हूँ मैं
समझ में ना आये किधर को जाऊ
इधर को जाऊ या उधर को जाऊ
आखिर मैं किधर को जाऊ
ना कोई साथी ना हमसफ़र है
किसको मैं हमराह बनाऊ
मंजिल मेरी दूर बहुत है
और बढ़ी मुश्किल इसकी डगर है
सफ़र अकेला कटेगा कैसे
कैसे मिलेगी मंजिल मुझको
साथी मिले थे राहों में जो
किसी मोड़ पर छुट गए है
भटक गया हूँ राह मैं या
वो मुझसे रूठ गए है
एक राह में जज्बातों की
एक रहा है अरमानो की
इस दुविधा घिरा हुआ हूँ
आखिर किस राह को अपनाऊ
दोराहे पर खड़ा हूँ मैं
समझ में ना आये किधर को जाऊ
इधर को जाऊ या उधर को जाऊ
आखिर मैं किधर को जाऊ
Saturday, September 29, 2012
बंदिश-ए-जिंदगी
आज फिर शरारत करने को दिल चाहता है
बंदिश-ए-जिंदगी मगर इसकी इजाजत नहीं देती
बिताना चाहता हूँ फिर रात तारों की छाँव में
उस नीले गगन के निचे
ये छत मगर किसी और का है
झूम लेना चाहत हूँ रिमझिम बरसती फुहार में
झूठी शान-ओ-शोकत मगर इसकी इजाजत नहीं देती
रंगीनियाँ ही रंगीनियाँ है इस शहर के चप्पे - चप्पे में
इस दिले-ए-नादान से गाँव की गलियाँ भुलाई नहीं जाती
सोचता हूँ लौट आऊं फिर उन्ही गांव की गलियों में
तमन्ना-ए-बुलंदी मगर इसकी इजाजत नहीं देती
आज फिर शरारत करने को दिल चाहता है
बंदिश-ए-जिंदगी मगर इसकी इजाजत नहीं देती
बंदिश-ए-जिंदगी मगर इसकी इजाजत नहीं देती
बिताना चाहता हूँ फिर रात तारों की छाँव में
उस नीले गगन के निचे
ये छत मगर किसी और का है
झूम लेना चाहत हूँ रिमझिम बरसती फुहार में
झूठी शान-ओ-शोकत मगर इसकी इजाजत नहीं देती
रंगीनियाँ ही रंगीनियाँ है इस शहर के चप्पे - चप्पे में
इस दिले-ए-नादान से गाँव की गलियाँ भुलाई नहीं जाती
सोचता हूँ लौट आऊं फिर उन्ही गांव की गलियों में
तमन्ना-ए-बुलंदी मगर इसकी इजाजत नहीं देती
आज फिर शरारत करने को दिल चाहता है
बंदिश-ए-जिंदगी मगर इसकी इजाजत नहीं देती
Thursday, September 6, 2012
तेरे लौट आने की आश लिए बैठा हूँ मैं
ख्याल जब भी आता है तेरा
तो मचल जाता हूँ मै
खंजर जब चलते है तेरी यादों के
तो संभल नहीं पता हूँ मैं
ये इश्क नहीं तो और क्या है ?
क्यों पल - पल तेरे बारे में सोचता हूँ मैं
भले ही खबर ना हो तुझे
ख्वाबों में भी अक्सर आवाज लगता हूँ मैं
अगर यकीं नहीं है तो, अपनी सखियों से पूछो
तेरी गांव की गलियों में, उस पनघट किनारे
कुछ पल रोज बिताता हूँ मैं
जिंदगी जो बची है कुछ पल की
तेरी यादों में गुजरता हु मैं
ये कहते है यार मेरे
तू हो चुकी है किसी और की
मगर फिर भी
तेरे लौट आने की आश लिए बैठा हूँ मैं
Sunday, September 2, 2012
कशमकश
मेरी भी चाहत वही थी, जो तेरी ख्वाईश थी
मचल रहे थे दो दिल अरमानो के तूफान लिए
पर ना तुम कुछ कह सके, ना मेरे ही लब हिले
हो रही थी बातें आँखों आँखों में
बेजुबान हम घंटों बैठे रहे, जैसे कि हो हमारे लब सिले
छाई थी बड़ी गहरी ख़ामोशी
इंतजार तुम्हे था मेरे कुछ कहने का,
मै सोच रहा था कि शायद तुम कुछ कहो
लब खामोश दिल बैचैन
और चाहत थी कि तुम युहीं सामने बैठी रही
फासले जो थे हमारे दरमियाँ, वो बस वक्त की जोर आजमाईश थी
न हम कदम बढ़ा सके, ना एक कदम तुम चल सके ||
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Sunday, October 30, 2011
पगली सी लड़की
आज सबेरे जब खिड़की से देखा
मौसम बड़ा सुहाना था
ऐसे मौसम को देख कर
जरुरी याद किसीका आना था
एक अल्हड सी, पगली सी लड़की
नटखट सी, शर्मीली सी लड़की
मेरे पड़ोस में रहती थी
उम्र थी उसकी 19 की
पर हरकत बच्चों सी वो करती थी
शाम सबेरे चुपके - चुपके
दूर से देखा करती थी
रोज सबेरे किसी ना किसी बहाने
घर भी आया करती थी
कहना था शायद उसको
जाने क्यों ना कह पाती थी
एक अल्हड सी, पगली सी लड़की
नटखट सी, शर्मीली सी लड़की
मेरे पड़ोस में रहती थी
ताकता रहता था मै भी उसको
उसकी हर अदा का मै दीवाना था
घंटों बैठ सड़क किनारे
इंतजार मै उसका करता था
जिस सड़क से उसका आना जाना था
तकते रहना दूर से एक - दूजे को
बस यही काम हमारा रोजाना था
मै तो था एक परदेशी
वापस मुझको तो आ जाना था
दूर हुए हम एक - दूजे से
फिर नहीं हमे मिल पाना था
आज सबेरे खिड़की से देखा
मौसम बड़ा सुहाना था
देख कर ऐसे मौसम को
उस अल्हड सी, प्यारी सी लड़की की
भोली सी सीधी साधी सी लड़की की
याद मुझे तो आना था
आज सबेरे जब खिड़की से देखा
मौसम बड़ा सुहाना
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Thursday, October 20, 2011
कमबख्त दिल
कमबख्त दिल न जाने क्या कर बैठता है
है जिसे पाना मुश्किल उसी पर मर मिटता है
है जिसे पाना मुश्किल उसी पर मर मिटता है
हस्ती भुला कर ये अपनी,
किसीको दुनिया बना लेता है
सपनों में अपने उसी को सजा लेता है
यादो को उसकी पलकों में बसा लेता है
आँखों को उसकी आइना बना लेता है
कम्बखत दिल न जाने क्या कर बैठता है
हाँथ बढाकर चाँद को तोडना चाहता है
जो हो नामुमकिन,
या वही करना चाहता है
ख्वाब देखता है ये ऐसा
जो कभी पूरा ही ना हो
कमबख्त दिल ना जाने क्या कर बैठता है.........
Saturday, October 15, 2011
I want sing, I want dance
I want sing, I want dance
I Want love, I want romance
I Want love, I want romance
दिल ने मेरे आज फैसला है किया
प्यार तुझसे ही करना है
तेरे संग जीना - मरना है
तेरे लिए कुछ भी मैं कर जाऊंगा
तू ना मिली तो मैं मर जाऊंगा
करले - करले तू मेरा विश्वास
I want sing, I want dance
I want love, I want Romance
Come, come, come baby come with me
I am your and your will be
Give me, Give me, Give me a chance
I want sing, I want dance
I want love, I want romance
पलकों में तुझको मैं छुपा लूँगा
सांसो में अपने मैं बसा लूँगा
धड़कन तुझे मैं अपनी बना लूँगा
जां से भी ज्यादा तुझे मैं चाहूँगा
दूर तुझसे न कभी मैं जाऊंगा
करता हूँ वडा मैं तुझसे सनम
मिलके जुदा न कभी होंगे हम
चाहे आजाये कोई तूफान
I want sing, I want dance
I want love, I want Romance
I will be always with you ओ मेरी जां
Give me, give me, give me a chance
I want sing, I want dance
I want love, I want romance
Friday, October 14, 2011
काश के हम बच्चें होते
काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
जल्दी सोते, जल्दी जागते
नहा - धोकर, सुबह - सबेरे
यारों के संग स्कूल को जाते
काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
ना चिंता, ना परवाह दुनियां की
बस मस्ती ही मस्ती होती
स्कूल को जाना, स्कूल से आना
चोरी से औरन की टिफिन का खाना
पकडे जाने पर बहाने बनाते
काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
किताबों में अपनी दुनिया होती
हिसाबों में ही हम खोये रहते
वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी
जब नानी सुनती थी परियों की कहानी
झूठ नहीं सब सच्चे लगते
काश के हम बच्चें होते
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Saturday, October 1, 2011
मेरी दुनिया जन्नत मेरी
सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको ही याद
करुणामयी है और ममतामयी है
स्नेह तेरी आँचल भरी है
पीड़ा सह कर जन्म दिया
करती मेरे लिए तू नित नए उपवास
पानी पहले मुझको पिलाये
लगता जब कभी तुझको है प्यास
छींक भी अगर आजाये मुझको
जागे तू सारी - सारी रात
दुख भी उठाती, सहती है कस्ट हजार
लेकिन फिर भी कभी होने ना दिया
मुझे जरा भी अहसास
हूँ परदेश दूर बहुत तुझसे
साया तेरा फिर भी हर पल है पास
सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको याद
मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर
ना जाऊं मैं तीर्थ कैलाश
मेरी दुनिया जन्नत मेरी
सब है माँ तेरे कदमो के पास
करूँ मैं माँ बस तुझको ही याद
करुणामयी है और ममतामयी है
स्नेह तेरी आँचल भरी है
पीड़ा सह कर जन्म दिया
करती मेरे लिए तू नित नए उपवास
पानी पहले मुझको पिलाये
लगता जब कभी तुझको है प्यास
छींक भी अगर आजाये मुझको
जागे तू सारी - सारी रात
दुख भी उठाती, सहती है कस्ट हजार
लेकिन फिर भी कभी होने ना दिया
मुझे जरा भी अहसास
हूँ परदेश दूर बहुत तुझसे
साया तेरा फिर भी हर पल है पास
सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको याद
मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर
ना जाऊं मैं तीर्थ कैलाश
मेरी दुनिया जन्नत मेरी
सब है माँ तेरे कदमो के पास
नन्हा फ़रिश्ता
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
रिश्ते नए कई लायेगा
बीवी, बहन, बेटी थी जो अब तक
अब वो कहलाएगी माँ
कोई बनेंगे दादा-दादी
नाना-नानी बनेंगे मरे पापा और माँ
तो कोई चाचा कहलायेगा
जीजू बनेगे पापा तो
मामा मुझे कोई बुलाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
खुशियाँ ही खुशियाँ लायेगा
फूलों सा कोमल, कलियों से नाजुक
होंगे उसके बदन
गुलाब की कोमल पंखुरियों से
होंगे उकसे होंठ
चाँद सा रौशन चेहरा होगा
आँखों में होगी तारों सी चमक
महक उठेगा घर आँगन
जब नन्हें कदमो से दौड़ लगाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
मेरा बचपन वापस लायेगा
कितनी मधुर होगी हो आवाज
जब वो तुतलायेगा
होगा वो पल कितना अनमोल
पहली बार वो जब
मामा मुझे बुलाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
रिश्ते नए कई लायेगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा........!!!
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मेरी तमन्ना
एक तमन्ना है मेरी बस......
चरणों में तेरे बीते ये जीवन
छाया बनके आँचल तेरा,
मेरे सर पर रहे सारी उम्र
मिला तुझसे है जीवन
तेरे चरणों में ही हो ख़त्म
धुल तेरे कदमों की
चमके सदा मेरे माथे पर
तेरे ममता के साये से
जाने ना पाऊं दूर उम्र भर
मेरी बस यही है चाहत है
साया तेरा सदा रहे मेरे सर पर
जब भी कभी डगमगाए मेरे कदम
मुझको थम ले तेरा दामन
ऐ मेरे जीवन के दाता
जननी मेरी मेरी माता
दे दे मुझको बस वर इतना सा
साथ रहे तेरा आशीष सदा
यही तमन्ना है मेरी बस......
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