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Friday, July 17, 2015

मुझे अपने पास बुला ले माँ

तन्हा बहुत हूँ तेरे बिना,
आकर गले लगा ले माँ ।।

रह ना सकूँ दूर अब मैं तुझसे,
मुझे आँचल में छुपा ले माँ ।।

सोई नहीं वर्षों से मेरी आँखें,
मुझे गोद में अपने सुला ले माँ।।

कमी नहीं कुछ, फिर भी भूख हूँ मैं,
रुखा - सुखा ही सही अपने हांथों से कुछ खिला दे माँ ।।

भूल हुई जो दूर मैं आया,
मेरी भूल को तू भुला दे माँ ।।

दौलत - शौहरत की नहीं चाह मुझे अब,
बस अपने पास बुला ले माँ ।।
मुझे अपने पास बुला ले माँ.........।।

Saturday, October 1, 2011

मेरी दुनिया जन्नत मेरी


सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको ही याद
करुणामयी है और ममतामयी है
स्नेह तेरी आँचल भरी है
पीड़ा सह कर जन्म दिया
करती मेरे लिए तू नित नए उपवास
पानी पहले मुझको पिलाये
लगता जब कभी तुझको है प्यास
छींक भी अगर आजाये मुझको
जागे तू सारी - सारी रात
दुख भी उठाती, सहती है कस्ट हजार
लेकिन फिर भी कभी होने ना दिया
मुझे जरा भी अहसास
हूँ परदेश दूर बहुत तुझसे
साया तेरा फिर भी हर पल है पास
सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको याद
मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर
ना जाऊं मैं तीर्थ कैलाश
मेरी दुनिया जन्नत मेरी
सब है माँ तेरे कदमो के पास