Showing posts with label kitabon. Show all posts
Showing posts with label kitabon. Show all posts

Friday, October 14, 2011

काश के हम बच्चें होते

काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
जल्दी सोते, जल्दी जागते
नहा - धोकर, सुबह - सबेरे 
यारों के संग स्कूल को जाते
काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
ना चिंता, ना परवाह दुनियां की 
बस मस्ती ही मस्ती होती
स्कूल को जाना, स्कूल से आना 
चोरी से औरन की टिफिन का खाना
पकडे जाने पर बहाने बनाते
काश के हम बच्चें होते
दिन वो कितने अच्छे होते
किताबों में अपनी दुनिया होती
हिसाबों में ही हम खोये रहते
वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी 
जब नानी सुनती थी परियों की कहानी
झूठ नहीं सब सच्चे लगते 
काश के हम बच्चें होते