हम पानी में आग लगा सकते हैं,
हम पत्थर पे फूल खिला सकते हैं,
हम बदल सकते है तक़दीर तुम्हारी,
झुका सकते है क़दमों में दुनिया सारी,
हम युवा ही असली शक्ति है,
बाकी सब तो मिटटी है.
युवा ही था वो वीर भगत, सुखदेव और राजगुरु
श्रधा से हर शीस जिसके आगे झुकती है
याद करो उस खुदीराम,
अंग्रेजो ने फंसी पर जिसे चढ़ाया था,
उम्र थी केवल 19 की,
आजादी की अलख उसने जगाया था.
हमने जो एक बार ठान लिया तो
कुछ भी हम कर जाते है
चट्टानों के सीनों को भी,
चिर के राहे हम बनाते है,
हम पानी में आग लगा सकते हैं
हम पत्थर पे फूल खिला सकते हैं
हम युवा ही असली शक्ति है
बाकी सब तो मिटटी है.
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