Showing posts with label Maa. Show all posts
Showing posts with label Maa. Show all posts

Friday, July 14, 2017

तुम हमेशा मेरे लिए खास हो



खिलती हुयी सुबह हो,
तुम ढलती हुयी शाम हो |
कड़कती धुप में, 
तुम शीतल छांव हो |
अंधेरमयी इस जीवन में, 
तुम जगमगाता प्रकाश हो |
माँ हमेशा ही मेरे लिए तुम खास हो.....!!

थक हार कर जब बैठ जाता हूँ मै,
तो जगती तुम नयी आश हो |
भूखा न सो सोजाऊं मैं कहीं
इसलिए रखती तुम उपवास हो 
तुम से ही है भूख मेरी 
और तुम ही मेरी प्यास हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!

छुपी रही है हमेशा भलाई मेरी,
चाहे तेरी डांट हो, या फटकार हो,
दर जाता हूँ आज भी तेरी ख़ामोशी से,
माँ तुम बैठा न करो यूँ उदास हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!

चाह नहीं है पैसों की, ना नाम की,
ना दुनिया के सलाम की
बस मेरे सर पर उम्र भर,
तेरा आशीष हो तेरा हाँथ हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!


Thursday, January 24, 2013

बेटी नहीं अभिशाप है


क्या कुसूर है उस नन्ही सी जान का ??
उसका तो नहीं अभी इस दुनिया में जान पहचान का














दे रहे हो उसे सजा किस बात की ??
उसे तो जरुरत है तुम्हारे ममता  भरे हाँथ की

खुद पर करो थोड़ी सी  शर्म
उस नन्ही जान पर करो कुछ तो रहम

दो मौका इसे पलने बढ़ने का
ये तो है एक नन्ही कली
दो मौका इसे खिलने का

आज बगिया तुम्हारी महकाएगी
कल एक नयी दुनिया को भी सजाएगी

जग में जो ये आ जाएगी
तो तेरा ही मान बढ़ाएगी

पहुचेगी कोई चाँद पर तो
तो कोई हिमालय पर तिरंगा लहराएगी

बेटी नहीं अभिशाप है
जीवनचक्र की एक शाख है

देखा नहीं उसने तो अभी चेहरा आज का
क्यों बना रहे उसे तुम पन्ना इतिहास का

Monday, October 8, 2012

माँ है तेरा आशीष बहुत



क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती  ??

माँ है तेरा आशीष बहुत 
जो हर संकट से मुझे बचाती है 

माँ तू मेरे लिए 
क्यों व्रत नए तू रखती है ??

देख के तुझको पीड़ा में 
दिल मेरा माँ रोता है 

धिक्कारता है मुझको मेरा मन 
कैसे चैन से तू सोता है ?

क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती ??

पा लेता हू जन्नत का सुख 
जब सर मेरा तू सहलाती है  

दूर हो जाती हर बाधा परेशानी 
जब गले तू मुझको लगाती है 

फिर माँ तू मेरे लिए 
क्यों व्रत नए तू रखती है ??

क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती है ??

Saturday, October 1, 2011

मेरी दुनिया जन्नत मेरी


सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको ही याद
करुणामयी है और ममतामयी है
स्नेह तेरी आँचल भरी है
पीड़ा सह कर जन्म दिया
करती मेरे लिए तू नित नए उपवास
पानी पहले मुझको पिलाये
लगता जब कभी तुझको है प्यास
छींक भी अगर आजाये मुझको
जागे तू सारी - सारी रात
दुख भी उठाती, सहती है कस्ट हजार
लेकिन फिर भी कभी होने ना दिया
मुझे जरा भी अहसास
हूँ परदेश दूर बहुत तुझसे
साया तेरा फिर भी हर पल है पास
सुबह - शाम दिन हो या रात
करूँ मैं माँ बस तुझको याद
मन्दिर, मस्जिद, गिरजाघर
ना जाऊं मैं तीर्थ कैलाश
मेरी दुनिया जन्नत मेरी
सब है माँ तेरे कदमो के पास