Saturday, October 1, 2011

नन्हा फ़रिश्ता

एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
रिश्ते नए कई लायेगा 
बीवी, बहन, बेटी थी जो अब तक
अब वो कहलाएगी माँ 
कोई बनेंगे दादा-दादी 
नाना-नानी बनेंगे मरे पापा और माँ
तो कोई चाचा कहलायेगा
जीजू बनेगे पापा तो 
मामा मुझे कोई बुलाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
खुशियाँ ही खुशियाँ लायेगा
फूलों सा कोमल, कलियों से नाजुक
होंगे उसके बदन 
गुलाब की कोमल पंखुरियों से
होंगे उकसे होंठ
चाँद सा रौशन चेहरा होगा
आँखों में होगी तारों सी चमक
महक उठेगा घर आँगन 
जब नन्हें कदमो से दौड़ लगाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
मेरा बचपन वापस लायेगा
कितनी मधुर होगी हो आवाज 
जब वो तुतलायेगा
होगा वो पल कितना अनमोल 
पहली बार वो जब 
मामा मुझे बुलाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
रिश्ते नए कई लायेगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा........!!!

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