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Saturday, August 10, 2019

पगडंडी



एक अरसे बाद कुछ लिखा है मैने आओ तुम्हे सुनाता हूँ
मेरे गाँव की टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी से तुम्हे मिलता हूँ

ये पगडंडी है जीवन की
रखना संभल-संभल के कदम

माना ये राह है मुश्किल, आसान नही है
सरपट दौड़ती पक्की सड़को के समान नही है
ठोकर कभी लग जाएंगे
तो कभी लड़खड़ा जाएंगे कदम
जैसे जीवन मे कुछ पाना
यारों इतना आसान नही है

चलना इनपे जो सिख लिया तो
मंजिल चूमेंगी तेरे कदम
जैसे झुक जाता है दूर कंही
धरती से मिलने ये नीला गगन

ये है जैसे हांथों की रेखा
सिमटी है जिसमे  किस्मत का लेखा
हर कोई जिसे समझ पाता नही

ये पगडंडी है जीवन की
टेढ़ी-मेढ़ी, उलझी-सुलझी
जैसे भ्रम जाल कोई
समझना अगर चाहोगे तो
मिलेंगे जीवन के रहस्य कई
गौर से देखो अगर इनको
तो
हृदय धमनियों को सुचारू रखने को
रक्त प्रवाहित करती जैसे हो  नब्ज कोई


ये बाँटें भले किनारें
मत समझो तुम इन्हें दरारें
ये ना हो तो जीवन फसल को
ले बह जाएं पानी की धारें.............

Sunday, December 2, 2012

घर का आँगन


आज कहाँ वो घर का आँगन
जो अंतहीन सा लगता था ???
कभी क्रिकेट तो कभी कबड्डी
का मैदान जो बनता था

हर घर की चारदीवारी में
एक नया जहान सा बसता था
दादा-दादी, मम्मी-पापा,
चाचा-चची, दीदी-बुआ
चहू दिशा से घर का हर दरवाजा
आ कर वही खुलता था

सर्दी की सुबह हो या
गर्मी की रातें
या फिर हो सावन की बरसातें
हर मौसम वही गुजरता था

गूंजता करता था देवर-भाभी की हास्य बम
तो सास-बहु, नन्द-भाभी में
शीत युद्ध भी होता था
आफत सी मच जाती थी घर में
जब बच्चा कोई रोता था

तब होता था एक बूढ़ा चापाकल
जो प्यास सभी की बुझाता था
जलता था एक ही मिटटी का चूल्हा
पर भूखा नहीं कोई सोता था

आँगन नहीं वो एक धुरी थी
जो हमको बांधे रखता था
धीरे-धीरे घटता गया
टुकड़ों में बांटता गया

आज कहाँ वो घर का आँगन
जो अंतहीन सा लगता था ????

Friday, November 16, 2012

जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !


जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान!
परम पिता तुम परमेश्वर मेरे
हम तेरे बालक नादान
हाँथ जोड़ कर हम करे वंदना
ना देना हमे बल और शोहरत
ना देना धन-धान्य
सत्य उअर धरम की राह चले हम
ध्येय हो जनकल्याण
प्रभु देना हमे ये वरदान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!

श्याम वर्ण, तुम श्वेताम्बर धारी
हाँथ तुम्हारे ना खडग, ना कमंडल
ना तीर तलवार
धर्मराज के तुम हो सहायक
कलम - दावत है पहचान
सुर - असुर, नर - मुनि, जिव - प्राणी
धर्म - कर्म का लेखा रखते सबका एक सामान
एक परम पिता हो तुम सबके
भानु, विभानु, विश्व्भानु, विर्यभानु
चारु, सुचारू, चित्राख्य, और मतिमान
हिमवान, चित्रचारु, अरुणा, जितन्द्री सब तेरे संतान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!

ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः नमः नमः

Sunday, November 11, 2012

दिवाली वो बचपन वाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सजता था सवारता था घर का कोना - कोना
और माँ बनती थी रंगोली सात रंगों वाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
जगमग - जगमग  दीपों से
माँ सजाती थी थाली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
दिए से दिए जलते थे
और बन जाती थी दीपावली

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
गली-चौबारे या हो घर का आँगन
हर जगह होते थे रौशन दिए वो मिटटी वाले

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
सुबह से होता था इन्तेजार शाम का
कब नए कपडे पहन हम खेलेंगे लुक्यारी

याद है आज भी दिवाली वो बचपन वाली
तरह - तरह के पकवान थे बनते
हमारे नजरो में होता था
बम,पटाखे,फुलझड़ी
और मिठाईयों से सजी प्रसाद की थाली

अब सब एक सपना सा लगता है
आज कहाँ है दिवाली वो बचपन वाली
और कहाँ घरौंधे वो मिटटी वाले ??



Monday, November 5, 2012

बदलती जिंदगी

जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे
और बदल रहा कारवां ।

बदल रही है दोस्ती, बदल रहा है प्यार भी 
और बदल रहा है ये जहाँ ।

अपने ही लगे है अब पीठ में खंजर घोपने,
हर कोई लगा है अब पेड़ साजिशों के रोपने,
इस जिंदगी का अर्थ क्या ? और है अंजाम क्या ?

यादें भी बदल रहे है, वादे भी बदल रहे है
और बदल रहा है दास्ताँ ।

ये जिंदगी अब खेल और इंसान खिलौना बन कर रहा गया ।
जिसे जी में आता खेलता है, फिर तोड़ खिलौना चल दिया ।।
बदल रहा सोच भी, बदल रहे लोग भी 
और बदल रही ये दुनिया ।

जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे 
और बदल रहा कारवां ।।

Friday, October 12, 2012

जाने क्या होगा इस देश का...??

जहाँ मंहगा डीजल, महंगी गैस
नेताओं की हो रही पूरी ऐश
जाने क्या होगा इस देश का ??

कहीं कई दिनों से नहीं जले है चूल्हे
नित सामने आते नए घोटाले
जाने क्या होगा इस देश का ??


खुले है नाले, सड़कों का है खस्ता हाल
फिर भी हो रहा भारत निर्माण
जाने क्या होगा इस देश का ??

सुबह खाए तो पड़े भूखा रात को सोना 
गोदामों में सड़ रहा अनाज
जाने क्या होगा इस देश का ??

कहीं पर सुखा कहीं अकाल
नेता हो रहे माला माल
जाने क्या होगा इस देश का ??

जनता मांगे रोजी रोजगार
मोबाईल बांटने चली सरकार
जाने क्या होगा इस देश का ??

कार्टून बनाना हुआ अपराध
बलात्कार हुआ साधारण सी बात
जाने क्या होगा इस देश का ??

चारो तरफ मचा है हाहाकार
लोकतंत्र पर से उठ गया विश्वास
जाने क्या होगा इस देश का ??

Tuesday, October 9, 2012

बहुत बढ़ गयी है मंगाई, लेकिन नहीं बढ़ी कमाई


आज सबेरे जब दफ्तर मैं पहुंचा
बॉस मेरा मुझसे पहले था आ बैठा
हाँथ जोड़ कर मैंने किया नमस्ते
हुयी देर क्यों बदले में उन्होंने पूछा
तब मैंने अपनी व्यथा सुनाई
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
समय से निकला था मैं घर से
लेकिन बहुत देर एक ऑटो आई
बैठा जल्दी - जल्दी में मैं
कही बैठ ना जाये दूसरा कोई भाई
ऑटो चला वहाँ से
लेकिन उनसे थोड़ी देर लगायी
मेरे अलावा ऑटो के अन्दर बैठी थी एक बूढी माई
कुछ चलने के बाद उन्होंने ऑटो रुकवाई
निकाला बटुआ और दिए कुछ पैसे
ऑटो वाले ने कहा ये क्या दे रही हो
और पैसे दो माई
माई बोली और क्यों दूँ
इतनी ही अब तक मैं देती आई
ड्राइवर बोला बात सही है तेरी माई
लेकिन देखो कितनी बढ़ गयी है मंहगाई
डीजल महंगा, गैस भी महंगा
राशन वाले ने भी दाम बढ़ाई
बिजली महंगी, पानी मंहगा
शब्जी वाले ने भी रेट बढ़ाई
बस कर, बस कर ये ले पैसे
बूढी माई ने फिर मुह बनायीं
दिया पैसे फिर गिन - गिन कर
लेकिन उन्होंने बहुत देर लगायी
उनकी भी नहीं है गलती कोई
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई
बॉस मेरा खामोश रहा
कुछ कहते ना उनसे बना
कहते भी मुझसे क्या
श्रीमान बहुत बढ़ गयी है मंगाई
लेकिन नहीं बढ़ी कमाई

Monday, October 8, 2012

माँ है तेरा आशीष बहुत



क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती  ??

माँ है तेरा आशीष बहुत 
जो हर संकट से मुझे बचाती है 

माँ तू मेरे लिए 
क्यों व्रत नए तू रखती है ??

देख के तुझको पीड़ा में 
दिल मेरा माँ रोता है 

धिक्कारता है मुझको मेरा मन 
कैसे चैन से तू सोता है ?

क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती ??

पा लेता हू जन्नत का सुख 
जब सर मेरा तू सहलाती है  

दूर हो जाती हर बाधा परेशानी 
जब गले तू मुझको लगाती है 

फिर माँ तू मेरे लिए 
क्यों व्रत नए तू रखती है ??

क्यों इतने दुःख सहती है ??
क्यों इतने कष्ट तू सहती है ??

Saturday, October 1, 2011

नन्हा फ़रिश्ता

एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
रिश्ते नए कई लायेगा 
बीवी, बहन, बेटी थी जो अब तक
अब वो कहलाएगी माँ 
कोई बनेंगे दादा-दादी 
नाना-नानी बनेंगे मरे पापा और माँ
तो कोई चाचा कहलायेगा
जीजू बनेगे पापा तो 
मामा मुझे कोई बुलाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
खुशियाँ ही खुशियाँ लायेगा
फूलों सा कोमल, कलियों से नाजुक
होंगे उसके बदन 
गुलाब की कोमल पंखुरियों से
होंगे उकसे होंठ
चाँद सा रौशन चेहरा होगा
आँखों में होगी तारों सी चमक
महक उठेगा घर आँगन 
जब नन्हें कदमो से दौड़ लगाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
मेरा बचपन वापस लायेगा
कितनी मधुर होगी हो आवाज 
जब वो तुतलायेगा
होगा वो पल कितना अनमोल 
पहली बार वो जब 
मामा मुझे बुलाएगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा
रिश्ते नए कई लायेगा
एक नन्हा फ़रिश्ता आएगा........!!!