जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे
और बदल रहा कारवां ।
बदल रही है दोस्ती, बदल रहा है प्यार भी
और बदल रहा है ये जहाँ ।
अपने ही लगे है अब पीठ में खंजर घोपने,
हर कोई लगा है अब पेड़ साजिशों के रोपने,
इस जिंदगी का अर्थ क्या ? और है अंजाम क्या ?
यादें भी बदल रहे है, वादे भी बदल रहे है
और बदल रहा है दास्ताँ ।
ये जिंदगी अब खेल और इंसान खिलौना बन कर रहा गया ।
जिसे जी में आता खेलता है, फिर तोड़ खिलौना चल दिया ।।
बदल रहा सोच भी, बदल रहे लोग भी
और बदल रही ये दुनिया ।
जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे
और बदल रहा कारवां ।।
No comments:
Post a Comment