Monday, November 5, 2012

बदलती जिंदगी

जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे
और बदल रहा कारवां ।

बदल रही है दोस्ती, बदल रहा है प्यार भी 
और बदल रहा है ये जहाँ ।

अपने ही लगे है अब पीठ में खंजर घोपने,
हर कोई लगा है अब पेड़ साजिशों के रोपने,
इस जिंदगी का अर्थ क्या ? और है अंजाम क्या ?

यादें भी बदल रहे है, वादे भी बदल रहे है
और बदल रहा है दास्ताँ ।

ये जिंदगी अब खेल और इंसान खिलौना बन कर रहा गया ।
जिसे जी में आता खेलता है, फिर तोड़ खिलौना चल दिया ।।
बदल रहा सोच भी, बदल रहे लोग भी 
और बदल रही ये दुनिया ।

जिंदगी बदल रहा, रास्ते बदल रहे 
और बदल रहा कारवां ।।

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