जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान!
परम पिता तुम परमेश्वर मेरे
हम तेरे बालक नादान
हाँथ जोड़ कर हम करे वंदना
ना देना हमे बल और शोहरत
ना देना धन-धान्य
सत्य उअर धरम की राह चले हम
ध्येय हो जनकल्याण
प्रभु देना हमे ये वरदान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!
श्याम वर्ण, तुम श्वेताम्बर धारी
हाँथ तुम्हारे ना खडग, ना कमंडल
ना तीर तलवार
धर्मराज के तुम हो सहायक
कलम - दावत है पहचान
सुर - असुर, नर - मुनि, जिव - प्राणी
धर्म - कर्म का लेखा रखते सबका एक सामान
एक परम पिता हो तुम सबके
भानु, विभानु, विश्व्भानु, विर्यभानु
चारु, सुचारू, चित्राख्य, और मतिमान
हिमवान, चित्रचारु, अरुणा, जितन्द्री सब तेरे संतान
जय जय जय श्री चित्रगुप्त भगवान !!
ॐ श्री चित्रगुप्ताय नमः नमः नमः

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