Showing posts with label Vikas Sinha. Show all posts
Showing posts with label Vikas Sinha. Show all posts

Friday, July 14, 2017

तुम हमेशा मेरे लिए खास हो



खिलती हुयी सुबह हो,
तुम ढलती हुयी शाम हो |
कड़कती धुप में, 
तुम शीतल छांव हो |
अंधेरमयी इस जीवन में, 
तुम जगमगाता प्रकाश हो |
माँ हमेशा ही मेरे लिए तुम खास हो.....!!

थक हार कर जब बैठ जाता हूँ मै,
तो जगती तुम नयी आश हो |
भूखा न सो सोजाऊं मैं कहीं
इसलिए रखती तुम उपवास हो 
तुम से ही है भूख मेरी 
और तुम ही मेरी प्यास हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!

छुपी रही है हमेशा भलाई मेरी,
चाहे तेरी डांट हो, या फटकार हो,
दर जाता हूँ आज भी तेरी ख़ामोशी से,
माँ तुम बैठा न करो यूँ उदास हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!

चाह नहीं है पैसों की, ना नाम की,
ना दुनिया के सलाम की
बस मेरे सर पर उम्र भर,
तेरा आशीष हो तेरा हाँथ हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!


Saturday, February 27, 2016

पलकों में तुम्हे सजायेंगे हम


तबस्सुम में मेरे कभी आओ तो तुम
लम्हा कोई साथ बिताओ तो तुम
पलकों में तुम्हे सजायेंगे हम
सांसो में अपने बसाएंगे हम
मिट जायेंगे ये फैसले खुद ही
कभी दो कदम तो  तुम

----------

Tuesday, May 1, 2012

पहले खुद को तुम बदल कर देखो

मंजिल नहीं आसान कोई,
कभी पैदल सफर बिता कर देखो

दर्द होता क्या औरो का
कभी ठोकर तुम खा कर देखो

सोना अगर है गहरी नींद में तो
मेहनत को अपना कर देखो

कीमत पता लगानी हो जो, रोटी के एक टुकड़े की तो
एक दिन भूखा बिता कर देखो

क्यूँ कहते है जल है जीवन
कभी प्यास को गले लगा कर देखो

लगेगी हर एक मुस्कान किमती
कभी आंसू अपने आँखों से बहा कर देखो

समझ आ जायेगी कीमत सच की
सच की राह अपना कर देखो

बदल जायेगी ये दुनिया लेकिन
पहले खुद को तुम बदल कर देखो