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Saturday, August 10, 2019

पगडंडी



एक अरसे बाद कुछ लिखा है मैने आओ तुम्हे सुनाता हूँ
मेरे गाँव की टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी से तुम्हे मिलता हूँ

ये पगडंडी है जीवन की
रखना संभल-संभल के कदम

माना ये राह है मुश्किल, आसान नही है
सरपट दौड़ती पक्की सड़को के समान नही है
ठोकर कभी लग जाएंगे
तो कभी लड़खड़ा जाएंगे कदम
जैसे जीवन मे कुछ पाना
यारों इतना आसान नही है

चलना इनपे जो सिख लिया तो
मंजिल चूमेंगी तेरे कदम
जैसे झुक जाता है दूर कंही
धरती से मिलने ये नीला गगन

ये है जैसे हांथों की रेखा
सिमटी है जिसमे  किस्मत का लेखा
हर कोई जिसे समझ पाता नही

ये पगडंडी है जीवन की
टेढ़ी-मेढ़ी, उलझी-सुलझी
जैसे भ्रम जाल कोई
समझना अगर चाहोगे तो
मिलेंगे जीवन के रहस्य कई
गौर से देखो अगर इनको
तो
हृदय धमनियों को सुचारू रखने को
रक्त प्रवाहित करती जैसे हो  नब्ज कोई


ये बाँटें भले किनारें
मत समझो तुम इन्हें दरारें
ये ना हो तो जीवन फसल को
ले बह जाएं पानी की धारें.............

Saturday, October 1, 2011

मेरी तमन्ना

एक तमन्ना है मेरी बस......
चरणों में तेरे बीते ये जीवन
छाया बनके आँचल तेरा, 
मेरे सर पर रहे सारी उम्र 
मिला तुझसे है जीवन
तेरे चरणों में ही हो ख़त्म 
धुल तेरे कदमों की 
चमके सदा मेरे माथे पर
तेरे ममता के साये से 
जाने ना पाऊं दूर उम्र भर
मेरी बस यही है चाहत है
साया तेरा सदा रहे मेरे सर पर
जब भी कभी डगमगाए मेरे कदम
मुझको थम ले तेरा दामन
ऐ मेरे जीवन के दाता
जननी मेरी मेरी माता
दे दे मुझको बस वर इतना सा
साथ रहे तेरा आशीष सदा
यही तमन्ना है मेरी बस......