Saturday, January 14, 2012

मेरा गाँव

याद आता है मेरा बचपन 
याद आते है वो जीवन 
हरयाली ही हरयाली थी चारो तरफ 
उन खेतों में ही बसा है अब तक मेरा मन 
जब खेतों में हल चल करते थे 
हम पीछे पीछे दौड़ा करते थे 
माँ-बाबा बिज थे बोते 
हम मिटटी के घरौंदे बनाया करते थे
जब से हम परदेश में आये
सपना बन गया वो मंजर 
याद आता है मेरा बचपन
याद आते है वो जीवन


जब कभी बागों में जाना 
दुसरोके बाघ से आम चुराना
खुद के बाग़  से कुछ न लाना 
कभी बच के निकल जाते तो 
कभी पकडे जाने पर 
रोने का झूठा बहाना करना
ये सब लगता है आब एक सपना 
कितना प्यारा था वो गाँव अपना 
ईद, दिवाली, होली पावन
मिल कर मानते थे सब हम
याद जब आती है उन लम्हों की 
आँखे हो जाती है नम
याद आता है मेरा बचपन 
याद आता है वो जीवन
 

No comments:

Post a Comment