आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी याद आई गोद तेरी
जब मैं परेशान होता था
सर रख के गोद में तेरी मैं
आँखे मूँद कर सो जाता था
सर को मेरे सहला कर
तू मुझको समझाती थी
बालों में फेर कर ऊँगली
माँ मुझको तू सुलाती थी
आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी
तेरे आँचल की निर्मल छांव में
धुप कड़ी भी बीत गयी
लेकिन आज मेरी माँ
लाल तेरा है फिर परेशान
ढूढता फिर गोद तेरी
सर रख कर दो पल सोने को
तेरी आँचल को ढुंढुं मैं
हाल बता कर रोने को
आज हूँ इतना दूर मैं तुझसे
साया भी ना दिख पाता है
सच कहता हूँ मेरी माँ
तेरे शिवा मुझे
कोई नहीं समझ पाता है
आज याद बहुत आई तेरी
तेरी कमी महसूस हुयी
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