ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी
कैसा ये नाता है या रिश्ता नया है कोई
ना तुझको देखा है मेने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी
कोई मुझे दो बता होता है ऐसा भी क्या कभी ..??
नाम तेरा लिख लिख कर मिटाता रहूँ
बनाता हूँ मैं हर तेरी तस्वीर एक नयी
तेरे ख्यालों में खोया रहूँ
न जाने क्यों था मुझको यकीं
मिल जायेगी तू मुझको कहीं ना कहीं
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी
पहली है ये मुलाकात अपनी
फिर तुम लगते नहीं अजनबी
मुझको तो लगता है ऐसा
जैसे बरसों से है हम साथ यहीं
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने क्यों एक सूरत तेरी इस दिल में बस गयी
मिल के तुझ से लगा मुझे
जैसे दुनिया ही बदल गयी हो मेरी
तेरी ही ही थी तलाश मुझे
थी तुझ बिन अधूरी मेरी जिंदगी
ना तुझको देखा है मैंने ना हम पहले मिले है कभी
फिर न जाने कैसे एक सूरत तेरी इस दिल में गयी
No comments:
Post a Comment