Sunday, January 15, 2012

कैसे भूल पाउँगा......!!!

कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को
पल जो सुहाने थे, वो गुजरे ज़माने है जो
कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को

दिन वो भरे थे जिनमे मस्ती
हर पल जिनमे मिलती थी बस खुशी
मिलते थे जभी हू आप कभी
बिखरती थी बस हंसी ही हंसी
फिर क्यों छाई है आज ये उदासी
कैसे लौटा पाउँगा मै उन मुस्कुराहटों को
कैसे भूल पाउँगा उन बीते दिनों को
बीते दिनों को उन गुजरे पलों को
याद आते हैं वो मस्ती भरे दिन
मस्ती भरे दिन वो शरत भरी रातें
वो तेरी बातें, वो तेरी यादें
वो तेरा मुस्कुराना, वो तेरा चलना
वो हंस-हंस कर तेरा बातें करना
वो रूठ कर तेरा खुद मान जाना
कैसे भूल पाऊंगा तेरी आँखों के कातिलाना अदाओं को

No comments:

Post a Comment