कैसे कहूँ क्या हूँ मैं .
मुझको खुद ये नहीं है पता .
हूँ अकेला इस दुनिया के भीड़ में,
एक साथी हूँ ढूंढता,
चाँद तारों की तमन्ना नहीं
न महलो में मैं रहना चाहता
न पता है कोई न ठिकाना मेरा,
बस दिलों में ही मैं रहना चाहता,
दिलों में ही रहना चाहता.
कैसे कहूँ क्या हूँ मैं.
मुझको खुद ये नहीं है पता
जिंदगी एक सफ़र है
और मुसाफिर हूँ मैं मंजिल बड़ी दूर है
और मुश्किल है रास्ता.
तनहा ये राह काटता नहीं
हमसफ़र हूँ मई चाहता,
कैसे कहूँ क्या हूँ मैं.
मुझको खुद ये नहीं है पता
मुझको खुद ये नहीं है पता .
हूँ अकेला इस दुनिया के भीड़ में,
एक साथी हूँ ढूंढता,
चाँद तारों की तमन्ना नहीं
न महलो में मैं रहना चाहता
न पता है कोई न ठिकाना मेरा,
बस दिलों में ही मैं रहना चाहता,
दिलों में ही रहना चाहता.
कैसे कहूँ क्या हूँ मैं.
मुझको खुद ये नहीं है पता
जिंदगी एक सफ़र है
और मुसाफिर हूँ मैं मंजिल बड़ी दूर है
और मुश्किल है रास्ता.
तनहा ये राह काटता नहीं
हमसफ़र हूँ मई चाहता,
कैसे कहूँ क्या हूँ मैं.
मुझको खुद ये नहीं है पता
No comments:
Post a Comment