Saturday, August 10, 2019

पगडंडी



एक अरसे बाद कुछ लिखा है मैने आओ तुम्हे सुनाता हूँ
मेरे गाँव की टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी से तुम्हे मिलता हूँ

ये पगडंडी है जीवन की
रखना संभल-संभल के कदम

माना ये राह है मुश्किल, आसान नही है
सरपट दौड़ती पक्की सड़को के समान नही है
ठोकर कभी लग जाएंगे
तो कभी लड़खड़ा जाएंगे कदम
जैसे जीवन मे कुछ पाना
यारों इतना आसान नही है

चलना इनपे जो सिख लिया तो
मंजिल चूमेंगी तेरे कदम
जैसे झुक जाता है दूर कंही
धरती से मिलने ये नीला गगन

ये है जैसे हांथों की रेखा
सिमटी है जिसमे  किस्मत का लेखा
हर कोई जिसे समझ पाता नही

ये पगडंडी है जीवन की
टेढ़ी-मेढ़ी, उलझी-सुलझी
जैसे भ्रम जाल कोई
समझना अगर चाहोगे तो
मिलेंगे जीवन के रहस्य कई
गौर से देखो अगर इनको
तो
हृदय धमनियों को सुचारू रखने को
रक्त प्रवाहित करती जैसे हो  नब्ज कोई


ये बाँटें भले किनारें
मत समझो तुम इन्हें दरारें
ये ना हो तो जीवन फसल को
ले बह जाएं पानी की धारें.............

Friday, September 29, 2017

सच


सच है सच बहुत कड़वा होता है
लेकिन जीवन का संजीवनी रस होता है

कब तक टिकेगी वो इमारत.......
झूठ पर टिकी हो जिसकी बुनियाद
सच तो ये है कि एक दिन उसे गिर जाना है
मिट्टी में ही मिल जाना है

सच पर टिकी हो जिसकी बुनियाद
रहेगा वो जब तक है दुनिया आबाद
सच की भले हो राह कठिन
इस राह में नही कुछ भी नामुमकिन

सच है ये धरती और गगन
अग्नि, जल और पवन
हर चीज बना है बस इसी पंचतत्त्व से
और होना है अंत मे इसी में मिलन....

सच की राह पर जो चलता जाए
बिना डरे, बिना घबराए
जो चाहे वो पता जाए ।

Friday, July 14, 2017

तुम हमेशा मेरे लिए खास हो



खिलती हुयी सुबह हो,
तुम ढलती हुयी शाम हो |
कड़कती धुप में, 
तुम शीतल छांव हो |
अंधेरमयी इस जीवन में, 
तुम जगमगाता प्रकाश हो |
माँ हमेशा ही मेरे लिए तुम खास हो.....!!

थक हार कर जब बैठ जाता हूँ मै,
तो जगती तुम नयी आश हो |
भूखा न सो सोजाऊं मैं कहीं
इसलिए रखती तुम उपवास हो 
तुम से ही है भूख मेरी 
और तुम ही मेरी प्यास हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!

छुपी रही है हमेशा भलाई मेरी,
चाहे तेरी डांट हो, या फटकार हो,
दर जाता हूँ आज भी तेरी ख़ामोशी से,
माँ तुम बैठा न करो यूँ उदास हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!

चाह नहीं है पैसों की, ना नाम की,
ना दुनिया के सलाम की
बस मेरे सर पर उम्र भर,
तेरा आशीष हो तेरा हाँथ हो |
माँ हमेशा ही तुम मेरे लिए खास हो....!!


Monday, February 20, 2017

उलझन

आज कुछ लिखने को जी चाहता है
पर क्या लिखूं समझ नहीं आ रहा

क्या लिखूं ऐ जिंदगी कि बहुत उदास हूँ तेरी महफ़िल में??
या लिखू कि तन्हा भटक रहा हूँ तेरे दुनिया के मेले में ??

आज कहने को जी चाहता है
क्या कहूँ समझ नहीं आ रहा

क्या कहूँ कि खत्म होती जा रही है मेरी मशुमियत
बढ़ती उम्र के साथ ??
या कहूँ कि बनावटी होता जा रहा हूँ मैं भी
बदलते वक़्त के साथ ??

आज कुछ भूलने को जी चाहता है
क्या भूलूँ समझ नहीं आ रहा

क्या भूलूँ ऐ जिंदगी कि कराई है पहचान रास्तों की तूने
कई ठोकरों के बाद ??
या भूल जाऊँ कि सम्भाला भी तूने ही था मुझे
गिरने के बाद ??

आज कुछ मांगने को जी चाहता है
क्या माँगूं समझ नहीं आ रहा

क्या माँगूं तुझसे ऐ ख़ुदा
दौलत माँगूं शोहरत माँगूं
या माँगूं महफ़िल यारों की ??
बुलंदी माँगूं कामयाबी माँगूं
या माँगूं शुकुन माँ के आँचल की ??

Saturday, February 27, 2016

पलकों में तुम्हे सजायेंगे हम


तबस्सुम में मेरे कभी आओ तो तुम
लम्हा कोई साथ बिताओ तो तुम
पलकों में तुम्हे सजायेंगे हम
सांसो में अपने बसाएंगे हम
मिट जायेंगे ये फैसले खुद ही
कभी दो कदम तो  तुम

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Saturday, August 8, 2015

क्या हुआ अगर हम मुस्कुरा न सकें....


तुझे इल्जाम दूँ कैसे मेरी जिंदगी
जरूर कमी मुझ में ही रही होगी ।।

यूँ बेवजह तो ठोकर लगा करती नहीं
जरूर आँखें मेरी ही बंद रही होंगी ।।

तू मुझसे जुदा हो गयी
या कोई और तेरे करीब आ गया,
इसमें खता तेरी नहीं
जरूर मैं ही तुझे अपना बना न सका ।।

हँसती - खिलखिलाती रहे तू खुदा करे
क्या हुआ जो हम मुस्कुरा न सके ।।

Friday, July 17, 2015

मुझे अपने पास बुला ले माँ

तन्हा बहुत हूँ तेरे बिना,
आकर गले लगा ले माँ ।।

रह ना सकूँ दूर अब मैं तुझसे,
मुझे आँचल में छुपा ले माँ ।।

सोई नहीं वर्षों से मेरी आँखें,
मुझे गोद में अपने सुला ले माँ।।

कमी नहीं कुछ, फिर भी भूख हूँ मैं,
रुखा - सुखा ही सही अपने हांथों से कुछ खिला दे माँ ।।

भूल हुई जो दूर मैं आया,
मेरी भूल को तू भुला दे माँ ।।

दौलत - शौहरत की नहीं चाह मुझे अब,
बस अपने पास बुला ले माँ ।।
मुझे अपने पास बुला ले माँ.........।।